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Suresh Raina ED Summons: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्टार बल्लेबाज और खब्बू खिलाड़ी सुरेश रैना से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को पूछताछ की. रैना को ईडी ने 13 अगस्त को समन भेजकर अपने दिल्ली दफ्तर बुलाया था. यह मामला ऑनलाइन बेटिंग ऐप 1xBet से जुड़ा हुआ है, जो भारत में प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म्स में शामिल है.
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने हाल के महीनों में ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ अपनी जांच तेज कर दी है. इसमें खास तौर पर उन सेलिब्रिटी और खिलाड़ियों पर ध्यान दिया जा रहा है, जिन्होंने इन कंपनियों के लिए विज्ञापन किए हैं. इन प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म्स में 1xBet, FairPlay, Parimatch और Lotus365 जैसे नाम शामिल हैं.
सुरेश रैना के मामले में, 1xBet ने दिसंबर 2023 में उन्हें अपना ब्रांड एंबेस्डर बनाया था. उस समय कंपनी ने उन्हें "रेस्पॉन्सिबल गेमिंग एंबेस्डर" का टैग दिया था और दावा किया था कि रैना ऐसे पहले एंबेस्डर हैं जो स्पोर्ट्स बेटिंग फैंस को जिम्मेदारी के साथ खेल में भाग लेने के लिए प्रेरित करेंगे. हालांकि, भारत में इस तरह की ऑनलाइन बेटिंग कानूनी रूप से मान्य नहीं है, और इन्हीं वजहों से ईडी इन सौदों की गहराई से जांच कर रही है.
ईडी पहले भी इस मामले में कई बड़े नामों से पूछताछ कर चुकी है. इसमें पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह और युवराज सिंह के साथ ही फिल्मी हस्तियां सोनू सूद और उर्वशी रौतेला भी शामिल हैं. माना जा रहा है कि इन सभी से पूछताछ का मकसद यह पता लगाना है कि उन्होंने इन कंपनियों के लिए प्रमोशन कैसे किया. भुगतान किस माध्यम से हुआ और क्या इन डील्स में मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अवैध लेन-देन की भूमिका रही.
1xBet और अन्य ऐसे प्लेटफॉर्म विदेशी ऑपरेटरों द्वारा चलाए जाते हैं और भारत में इनके विज्ञापन कानूनी विवादों का कारण बन चुके हैं. कई बार यह आरोप भी लगाए गए हैं कि ऐसे ऐप न केवल सट्टेबाजी को बढ़ावा देते हैं, बल्कि अवैध वित्तीय लेन-देन का जरिया भी बनते हैं.
सुरेश रैना की पूछताछ ऐसे समय हो रही है जब ईडी पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की कोशिश में है. फिलहाल रैना या उनके प्रतिनिधियों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. यह देखना दिलचस्प होगा कि ईडी की जांच आगे किन नामों तक पहुंचती है और क्या इसमें और भी मशहूर खिलाड़ी या फिल्मी सितारे शामिल निकलते हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर
Business News: अमेरिकी डॉलर इस साल जबरदस्त दबाव में नजर आ रहा है. साल 1973 के बाद पहली बार किसी एक कैलेंडर वर्ष में डॉलर की इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. फिलहाल भारतीय रुपये के मुकाबले एक डॉलर की कीमत 85 रुपये के आसपास है, जबकि 20 जून को यह 86.60 रुपये पर था. साल की शुरुआत से अब तक डॉलर कई वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले करीब 10 फीसदी कमजोर हो चुका है.
डॉलर में लगातार गिरावट से उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई है जिन्होंने अपनी पूंजी अमेरिकी मुद्रा में लगाई थी. कई लोग अब इस निवेश से बाहर निकलने की तैयारी कर रहे हैं ताकि अगर बाजार में गिरावट आती है तो नुकसान को टाला जा सके. इसका फायदा सीधे तौर पर भारतीय बाजारों को मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार से आने वाली कीमतें घटेंगी.
डॉलर के गिरावट की वजह क्या है?
एक्सपर्ट के मुताबिक, अमेरिका की मौजूदा ट्रेड पॉलिसी इसकी एक बड़ी वजह है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जरिये लागू की गई टैरिफ नीति की वजह से चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों से आने वाले सामान पर इंपोर्ट शुल्क बढ़ गया है. इससे वहां महंगाई का स्तर ऊंचा हुआ है और डॉलर कमजोर पड़ा है.
अब तक अमेरिकी डॉलर को सबसे सुरक्षित करेंसी माना जाता था, लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई और बाजार की अस्थिरता ने लोगों का भरोसा डगमगाया है. अमेरिका के लोग अब ज्यादा निवेश करने के बजाय अपनी पूंजी बचाकर रखने में भरोसा दिखा रहे हैं.
अमेरिकी निवेशकों में बढ़ी बेचैनी
हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में फाइनेंस के प्रोफेसर पाउलो पैस्का का कहना है कि टैरिफ में बढ़ोतरी ने अमेरिकी बाजार को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाया है. उत्पादों की लागत बढ़ने से महंगाई और उपभोक्ताओं पर दबाव दोनों ही बढ़े हैं.
ऐसे में निवेशकों का भरोसा घटा है और अमेरिका की आर्थिक स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं. अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो अमेरिका की आर्थिक ग्रोथ पर भी इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है. एक्सपर्ट इसके लिए डोनाल्ड ट्रंप के बड़बोलेपन और उनकी आर्थिक नीतियों को बड़ी वजह बता रहे हैं.
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CJI BR Gavai: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स को लेकर मज़ाकिया लेकिन सटीक टिप्पणी की. उन्होंने कहा, “आजकल क्लाइंट को बहुत जल्दी बुरा लग जाता है, आपके मुवक्किल बहुत नाराज़ हो जाते हैं.”
दरअसल, कोर्ट में एक केस की सुनवाई चल रही थी जिसमें न्यायिक सेवा (Judicial Service) में पदोन्नति के सीमित अवसरों से जुड़े मुद्दे पर बहस हो रही थी. इस मामले की सुनवाई CJI बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच कर रही थी. सुनवाई के दौरान जब जस्टिस चंद्रन को कुछ निजी तौर पर कहना था, तो उन्होंने कुछ सेकंड के लिए कोर्ट रूम का माइक म्यूट (Mute) कर दिया. इसके बाद उन्होंने CJI गवई से कुछ बात की जो पब्लिक ऑडियो में नहीं आई.
CJI ने क्या कहा?
इस पर CJI ने मुस्कराते हुए कहा, “मेरे भाई (जस्टिस चंद्रन) को कुछ कहना था, लेकिन हमें नहीं पता कि इसकी रिपोर्टिंग कैसे की जाएगी, इसलिए उन्होंने बात सिर्फ मुझसे की.” इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स पर व्यंग्य किया और कहा, “आजकल सोशल मीडिया पर हमें नहीं पता होता कि कौन सी बात कैसे रिपोर्ट होगी. हो सकता है कि आपका क्लाइंट बहुत नाराज़ हो जाए.”
CJI के टिप्पणी के क्या है मायने
CJI की यह टिप्पणी अदालत में मौजूद लोगों को हल्के-फुल्के अंदाज़ में हंसाने वाली थी, लेकिन इसमें एक गंभीर संदेश भी छिपा था कि अब सोशल मीडिया पर न्यायालय की हर छोटी बात तुरंत वायरल हो जाती है और कई बार उसका गलत अर्थ निकाला जाता है. यह टिप्पणी उस घटना के एक दिन बाद आई जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने CJI पर जूता फेंकने की कोशिश की थी. वकील, CJI की एक टिप्पणी से नाराज़ था और उसने अदालत में ही गुस्से का इज़हार किया था. हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत स्थिति को संभाल लिया था.
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Bihar NDA Seat Sharing 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए (NDA) गठबंधन में सीटों का बंटवारा लगभग तय हो गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाल ही में हुए दिल्ली दौरे के बाद गठबंधन की बड़ी पार्टियों और सहयोगियों के बीच सीटों को लेकर सहमति बन गई है. अब केवल आधिकारिक घोषणा बाकी है, जो जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए की जाएगी.
जेडीयू और भाजपा में बराबरी का मुकाबला
सूत्रों के मुताबिक, सीट शेयरिंग में जनता दल यूनाइटेड (JDU) को 102 और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 101 सीटें दी गई हैं. दोनों ही दल लगभग बराबरी की स्थिति में चुनाव लड़ेंगे. माना जा रहा है कि कुछ सीटों पर अभी अंतिम मंथन चल रहा है, जिसके चलते JDU और BJP में 1-2 सीटों का अंतर आ सकता है.
छोटे दलों को मिला सम्मानजनक हिस्सा
गठबंधन में शामिल चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) यानी LJP (R) को 20 सीटें दी गई हैं. इसके अलावा जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 10-10 सीटें मिली हैं. इससे साफ है कि एनडीए ने छोटे सहयोगियों को भी सम्मानजनक जगह देने की कोशिश की है.
जल्द होगी प्रेस कॉन्फ्रेंस
भले ही सीटों का फॉर्मूला लगभग तय हो चुका है, लेकिन NDA की तरफ से इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है. सूत्रों का कहना है कि सभी दलों की सहमति बनने के बाद गठबंधन की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इसे सार्वजनिक किया जाएगा. वहीं, किस पार्टी को कौन-कौन सी सीटें दी जाएंगी, इस पर फिलहाल मंथन जारी है.
नीतीश के दिल्ली दौरे के बाद बनी सहमति
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हालिया दिल्ली दौरा बेहद अहम माना जा रहा था. इस दौरे के दौरान केंद्रीय नेतृत्व के साथ लंबी बातचीत हुई और वहीं से सीट बंटवारे की तस्वीर लगभग साफ हो गई. नीतीश कुमार और भाजपा के शीर्ष नेताओं के बीच हुई बैठक ने गठबंधन की स्थिति स्पष्ट कर दी है.
विपक्ष पर नजर
NDA के भीतर सीट बंटवारे का मामला लगभग सुलझने के बाद अब सभी दल अपनी-अपनी तैयारियों में जुट जाएंगे. इधर, विपक्षी महागठबंधन भी अपनी रणनीति बनाने में व्यस्त है. एनडीए की यह कवायद साफ करती है कि गठबंधन अब चुनावी मैदान में मजबूती से उतरने के लिए तैयार है.