बीजेपी के फायर ब्रांड नेता विनय कटियार (फाइल फोटो)
Vinay Katiyar Controversial Remarks on Ayodhya Muslims: अयोध्या की सियासत एक बार फिर गरमा गई है. भाजपा के फायर ब्रांड नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार ने बुधवार (24 सितंबर) को विवादित बयान देते हुए कहा कि मुसलमानों को जल्द से जल्द अयोध्या छोड़ देना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मंदिर नगरी में किसी भी मस्जिद के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी.
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे कटियार ने यह टिप्पणी एक प्रेस वार्ता के दौरान तब की, जब उनसे पूछा गया कि स्थानीय प्रशासन ने एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के अभाव में धन्नीपुर मस्जिद की योजना को खारिज क्यों किया. कटियार ने कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद के बदले कोई नई मस्जिद या किसी अन्य मस्जिद के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी.
विनय कटियार ने साफ तौर पर धमकी देते हुए कहा कि अयोध्या में रहने वाले मुसलमानों को यहां रहने का कोई अधिकार नहीं है. कटियार ने कहा कि उन्हें किसी भी कीमत पर अयोध्या से बाहर निकाला जाएगा और उसके बाद पूरे उत्साह के साथ दिवाली मनाई जाएगी. इतना ही नहीं कटियार ने यह भी कहा कि मुसलमानों का अयोध्या से "कोई लेना-देना नहीं है" और उन्हें जिला खाली करके सरयू नदी के पार चले जाना चाहिए.
राम मंदिर आंदोलन में कटियार का कद बड़ा रहा है. वह बजरंग दल के संस्थापक में शामिल है और कारसेवकों को संगठित करने में अहम योगदान दिया. 1992 के बाबरी मस्जिद गिराने के मामले में विनय कटियार को 32 अभियुक्तों में से एक थे, लेकिन 2020 में सीबीआई की विशेष अदालत ने कटियार समते और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया. भाजपा की छात्र शाखा एबीवीपी से ही उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की.
राम जन्मभूमि आंदोलन को ताकत देने के लिए 1984 में विनय कटियार ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की युवा शाखा बजरंग दल की स्थापना की. इसी संगठन ने अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन को नई दिशा दी. भाजपा ने उन्हें 1991, 1996 और 1999 में अयोध्या (तब फैजाबाद) से लोकसभा का टिकट दिया और वे सांसद बने. इसके अलावा 2006 से 2012 और 2012 से 2018 तक वे राज्यसभा सांसद भी रहे.
कटियार के बयान पर अयोध्या से सपा के सांसद अवधेश प्रसाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि कटियार का दिमाग कमजोर हो गया है. यह देश किसी एक धर्म के अनुयायियों का नहीं है. यह यहां रहने वाले सभी धर्मों के लोगों का है. सांसद ने कटियार को चेतावनी दी कि उन्हें अपनी बातों पर ध्यान देना चाहिए और ऐसे भड़काऊ बयान देने से बचना चाहिए.
फाइल फोटो
Azam Khan release: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है. थोड़ी ही देर में वे उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल से रिहा होंगे. आजम खान लगभग 23 महीने बाद जेल से बाहर आ रहे हैं. उनकी रिहाई के आदेश सीतापुर जेल प्रशासन को मिल चुके हैं.
जानकारी के अनुसार, आजम खान के खिलाफ कुल 72 मुकदमे दर्ज थे. इनमें से हाल ही में एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने 19 मामलों में रिहाई के आदेश जारी किए. इससे पहले, ‘क्वालिटी बार प्रकरण’ समेत 53 अन्य मामलों में भी रिहाई के आदेश मिल चुके थे. इस तरह कुल मामलों में रिहाई के आदेश 72 मुकदमों तक पहुंच गए हैं, जिससे आजम खान जेल से बाहर आ सकेंगे.
जेल से रिहाई के बाद उनका स्वागत करने के लिए समर्थकों की बड़ी संख्या जेल के बाहर जमा हो गई है. समर्थक झंडे, पोस्टर और बैनर लेकर खड़े हैं, और उनके जश्न का माहौल देखने को मिल रहा है. समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने सुबह से ही सीतापुर जेल के बाहर इंतजार करना शुरू कर दिया था.
आजम खान की रिहाई राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ पार्टी की रणनीति और संगठन में एक प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं. उनकी जेल से रिहाई के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है. आजम खान की रिहाई के बाद उनके समर्थक उन्हें सीतापुर जेल से निकालते हुए, बड़ी संख्या में स्वागत करेंगे.
बिहार चुनाव दागी उम्मीदवार
बिहार चुनाव 2025 का माहौल गर्म है, लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ सियासी वादों की नहीं, बल्कि नेताओं की ‘क्राइम फाइल’ की भी है. ADR यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने अपनी नई रिपोर्ट में खुलासा किया है कि राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के कई प्रत्याशी गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी हैं. इसमें हत्या, बलात्कार और भ्रष्टाचार जैसे मामलों से जुड़े नाम भी शामिल हैं. सवाल अब ये है - क्या बिहार की राजनीति से अपराध का साया कभी हट पाएगा?
दरअसल, एक दिन पहले एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और बिहार इलेक्शन वॉच ने बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में चुनाव लड़ रहे 1314 उम्मीदवारों में से 1303 के शपथ पत्रों का विश्लेषण कर बड़ा खुलासा किया है. इनमें 1303 उम्मीदवार क्रिमिनल्स हैं. वामपंथी दलों के लगभग सभी प्रत्याशियों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज हैं.
अगर पार्टीवार आपराधिक प्रवृति के प्रमुख दलों की बात करें तो जन सुराज पार्टी के 114 उम्मीदवारों में से 49 (43%), बसपा के 89 उम्मीदवारों में से 16 (18%), आरजेडी के 70 उम्मीदवारों में से 42 (60%), जदयू के 57 उम्मीदवारों में से 15 (26%), भाजपा के 48 उम्मीदवारों में से 27 (56%), आम आदमी पार्टी के 44 उम्मीदवारों में से 9 (20%), कांग्रेस के 23 उम्मीदवारों में से 12 (52%), भाकपा (माले) (एल) के 14 उम्मीदवारों में से 9 (64%), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 13 उम्मीदवारों में से 5 (38%), भाकपा के 5 उम्मीदवारों में से 4 (80%) और माकपा के 3 उम्मीदवारों में से 3 (100%) ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं.
आपराधिक बैकग्राउंड वाले उम्मीदवार
1314 में 1303 उम्मीदवारों में से 423 (32%) उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. जबकि गंभीर आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवार 1314 में से 354 (27%) हैं. हत्या से संबंधित मामले 33 उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या (आईपीसी की धारा-302, 303) और (बीएनएस की धारा-103(1)) के दर्ज हैं. 86 उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या के प्रयास (आईपीसी की धारा-307) और (बीएनएस की धारा-109) के मामले दर्ज हैं.
महिलाओं के खिलाफ अपराध
1303 उम्मीदवारों में 42 उम्मीदवारों के खिलाफ महिलाओं से संबंधित मामले दर्ज हैं. 42 उम्मीदवारों में से 2 उम्मीदवारों पर बलात्कार (आईपीसी की धारा-376) से संबंधित मामलों में एफआईआर दर्ज हैं.
रेड अलर्ट वाले विधानसभा क्षेत्र
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 निर्वाचन क्षेत्रों में से 91 (75%) रेड अलर्ट - अति संवेदनशीलन सीट क्षेत्र हैं. रेड अलर्ट निर्वाचन क्षेत्र वे हैं जहां चुनाव लड़ रहे 3 या अधिक उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं.
40% प्रत्याशी करोड़पति
1303 उम्मीदवारों में से 519 (40%) करोड़पति हैं. प्रमुख दलों में जन सुराज पार्टी के 114 उम्मीदवारों में से 81 (71%), राजद के 70 उम्मीदवारों में से 68 (97%), जदयू के 57 उम्मीदवारों में से 52 (91%), भाजपा के 48 उम्मीदवारों में से 44 (92%), बसपा के 89 उम्मीदवारों में से 27 (30%), कांग्रेस के 23 उम्मीदवारों में से 18 (78%), आप के 44 उम्मीदवारों में से 13 (30%), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 13 उम्मीदवारों में से 10 (77%), भाकपा के 5 उम्मीदवारों में से 3 (60%), माकपा के 3 उम्मीदवारों में से 2 (67%) और भाकपा (माले) के 14 उम्मीदवारों में से 2 (14%) ने 1 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति घोषित की है.
औसत संपत्ति
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में चुनाव लड़ रहे प्रत्येक उम्मीदवार की औसत संपत्ति 3.26 करोड़ रुपये है.
कितने पढ़े लिखे हैं उम्मीदवार
519 (40%) उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता 5वीं और 12वीं कक्षा के बीच घोषित की है. जबकि 651 (50%) उम्मीदवारों ने स्नातक या उससे अधिक की शैक्षिक योग्यता रखते हैं. 19 उम्मीदवार डिप्लोमा धारक हैं. 105 उम्मीदवारों ने खुद को केवल साक्षर और 8 उम्मीदवार निरक्षर घोषित किया है. 1 उम्मीदवार ने हलफनामे में अपनी शैक्षिक जानकारी नहीं दी है.
51% उम्मीदवार युवा
463 (36%) उम्मीदवारों ने अपनी आयु 25 से 40 वर्ष के बीच घोषित की है, जबकि 669 (51%) उम्मीदवारों ने अपनी आयु 25 से 40 वर्ष के बीच घोषित की है.
हिसाहितो
जापान के शाही परिवार में लंबे समय बाद बड़ा बदलाव हुआ है. सम्राट नारुहितो के भतीजे और राजकुमार अकिशिनो के बेटे हिसाहितो ने हाल ही में 18 साल (एडल्टहुड) पूरे कर लिए हैं. यानी शाही परिवार को वयस्क (एडल्टहुड) उत्तराधिकारी मिल गया है. यह खास इसलिए है क्योंकि वे पिछले 40 साल में ऐसे पहले पुरुष हैं, जिन्होंने शाही परिवार में यह पड़ाव हासिल किया है. अब राजकुमार राजकुमार हिसाहितो एक दिन सम्राट बन सकते हैं.
हिसाहिता का वयस्क होना अहम क्यों?
वर्तमान में जापान के सम्राट नारुहितो हैं, लेकिन उनका कोई पुत्र नहीं है. ऐसे में उत्तराधिकार की लाइन उनके छोटे भाई राजकुमार अकिशिनो (फुमिहितो) तक जाती है. अकिशिनो के बाद उनके बेटे राजकुमार हिसाहितो तीसरे नंबर पर हैं. यही वजह है कि हिसाहितो का एडल्टहुड हासिल करना जापान के लोगों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
सम्राट नारुहितो के 19 वर्षीय भतीजे क्रिसेंथेमम सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में दूसरे स्थान पर हैं. उनके बाद कोई अन्य पुरुष उत्तराधिकारी न होने के कारण जापान पर 19वीं सदी के केवल पुरुषों के उत्तराधिकार के नियमों पर पुनर्विचार करने का दबाव बढ़ रहा है.
हिसाहिता का एडल्टहुड हासिल करने पर विशेष कार्यक्रम का पिछले एक साल से लोग इंतजार कर रहे थे. यह कार्यक्रम अभी तक इसलिए नहीं हो पाया था कि हिसाहिता विश्वविद्यालय परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित कर अध्ययन में व्यस्त थे. शनिवार को उनके पारिवारिक निवास पर वयस्क पुरुष होने कार्यक्रम शुरू हुआ, जहां उन्हें सम्राट के एक दूत से एक कन्मुरी मुकुट प्राप्त हुआ.
क्यों जताया सम्राट का जताया आभार
द गार्जियन के अनुसार हिसाहितो ने कहा, "आज वयस्क होने के समारोह में मुकुट प्रदान करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद." "मैं शाही परिवार के एक वयस्क सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करूंगा."
ड्रैगनफ्लाई में है नए युवराज की खास रुचि
हिसाहितो का जन्म 6 सितंबर, 2006 को हुआ था. वह युवराज अकिशिनो और युवराज किको के इकलौते पुत्र हैं. हिसाहितो इस समय त्सुकुबा विश्वविद्यालय में जीव विज्ञान की पढ़ाई कर रहे हैं. नए छात्र के रूप में उनकी विशेष रुचि ड्रैगनफ्लाई में है. उन्होंने अपनी अकासाका संपत्ति में कीटों पर एक अध्ययन का सह-लेखन किया है. बताया जाता है कि उनका लक्ष्य शहरी कीट आबादी के संरक्षण पर केंद्रित है.
इस नियम के तहत मिला युवराज होने का दर्जा
हिसाहितो की दो बड़ी बहनें है. काको और पूर्व राजकुमारी माको, जिन्होंने एक आम आदमी से शादी करने के बाद अपना शाही दर्जा त्याग दिया था. हालांकि, सम्राट नारुहितो की एक बेटी 23 वर्षीय राजकुमारी आइको है, लेकिन 1947 के शाही परिवार कानून के तहत उन्हें उत्तराधिकार की पंक्ति से वंचित कर दिया गया है, जो सिंहासन को पुरुषों तक सीमित करता है.
राजशाही को बचाने का संकट
वर्तमान में शाही परिवार में 16 वयस्क सदस्य हैं, लेकिन केवल युवराज अकिशिनो और राजकुमार हिसाहितो ही युवा पुरुष उत्तराधिकारी के रूप में बचे हैं. एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार पूर्व शाही परिवार एजेंसी प्रमुख शिंगो हाकेटा ने कहा, "मूल प्रश्न यह नहीं है कि पुरुष या महिला उत्तराधिकार की पंक्ति को अनुमति दी जाए, बल्कि यह है कि राजशाही को कैसे बचाया जाए?"
क्या है जापानी राज परिवार का इतिहास
जापान का शाही परिवार दुनिया का सबसे पुराना वंशानुगत राजघराना माना जाता है. इसमें उत्तराधिकार का नियम बेहद सख्त हैं. साल 1947 के इम्पीरियल हाउस लॉ के मुताबिक शाही परिवार की गद्दी पर केवल पुरुष ही बैठ सकते हैं. यानी सम्राट की बेटियां या महिला सदस्य उत्तराधिकारी नहीं बन सकतीं.
वर्तमान में जापान के सम्राट नारुहितो हैं, लेकिन उनका कोई पुत्र नहीं है. ऐसे में उत्तराधिकार की लाइन उनके छोटे भाई राजकुमार अकिशिनो (फुमिहितो) तक जाती है. अकिशिनो के बाद उनके बेटे राजकुमार हिसाहितो तीसरे नंबर पर हैं. यही वजह है कि हिसाहितो का एडल्टहुड हासिल करना बेहद अहम माना जा रहा है. मौजूदा समय में केवल तीन पुरुष ही लाइन ऑफ सक्सेशन में शामिल हैं. इनमें राजकुमार अकिशिनो (फुमिहितो) सम्राट नारुहितो के छोटे भाई, राजकुमार हिसाहितो (अकिशिनो के बेटे और प्रिंस हिताची) सम्राट नारुहितो के चाचा.
यही वजह है कि शाही उत्तराधिकार के लिहाज से शाही परिवार का भविष्य काफी हद तक हिसाहितो पर टिका हुआ है. अगर नियमों में बदलाव नहीं हुए तो वे आने वाले समय में जापान के क्राउन प्रिंस और उसके बाद सम्राट बनने के सबसे मजबूत दावेदार हैं.