How to start Datacenter or Domain and hosting business ?
Top Digital Marketing Companies
Top Flutter App Development Companies
How to earn money Online ?
How to start Ecommerce business ?
इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
BBDS App Download
× Bindass Bol Home About News Contact Search

बीजेपी नेता विनय कटियार की धमकी; मुसलमानों को दी अयोध्या छोड़ने की चेतावनी

बीजेपी के फायर ब्रांड नेता विनय कटियार (फाइल फोटो)

बीजेपी के फायर ब्रांड नेता विनय कटियार (फाइल फोटो)

Vinay Katiyar Controversial Remarks on Ayodhya Muslims: अयोध्या की सियासत एक बार फिर गरमा गई है. भाजपा के फायर ब्रांड नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार ने बुधवार (24 सितंबर) को विवादित बयान देते हुए कहा कि मुसलमानों को जल्द से जल्द अयोध्या छोड़ देना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मंदिर नगरी में किसी भी मस्जिद के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी. 

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे कटियार ने यह टिप्पणी एक प्रेस वार्ता के दौरान तब की, जब उनसे पूछा गया कि स्थानीय प्रशासन ने एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के अभाव में धन्नीपुर मस्जिद की योजना को खारिज क्यों किया. कटियार ने कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद के बदले कोई नई मस्जिद या किसी अन्य मस्जिद के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी. 

विनय कटियार ने साफ तौर पर धमकी देते हुए कहा कि अयोध्या में रहने वाले मुसलमानों को यहां रहने का कोई अधिकार नहीं है. कटियार ने कहा कि उन्हें किसी भी कीमत पर अयोध्या से बाहर निकाला जाएगा और उसके बाद पूरे उत्साह के साथ दिवाली मनाई जाएगी. इतना ही नहीं कटियार ने यह भी कहा कि मुसलमानों का अयोध्या से "कोई लेना-देना नहीं है" और उन्हें जिला खाली करके सरयू नदी के पार चले जाना चाहिए.

राम मंदिर आंदोलन में कटियार का कद बड़ा रहा है. वह बजरंग दल के संस्थापक में शामिल है और कारसेवकों को संगठित करने में अहम योगदान दिया. 1992 के बाबरी मस्जिद गिराने  के मामले में विनय कटियार को 32 अभियुक्तों में से एक थे, लेकिन 2020 में सीबीआई की विशेष अदालत ने कटियार समते और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया. भाजपा की छात्र शाखा एबीवीपी से ही उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की.

राम जन्मभूमि आंदोलन को ताकत देने के लिए 1984 में विनय कटियार ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की युवा शाखा बजरंग दल की स्थापना की. इसी संगठन ने अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन को नई दिशा दी. भाजपा ने उन्हें 1991, 1996 और 1999 में अयोध्या (तब फैजाबाद) से लोकसभा का टिकट दिया और वे सांसद बने. इसके अलावा 2006 से 2012 और 2012 से 2018 तक वे राज्यसभा सांसद भी रहे.

कटियार के बयान पर अयोध्या से सपा के सांसद अवधेश प्रसाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि कटियार का दिमाग कमजोर हो गया है. यह देश किसी एक धर्म के अनुयायियों का नहीं है. यह यहां रहने वाले सभी धर्मों के लोगों का है. सांसद ने कटियार को चेतावनी दी कि उन्हें अपनी बातों पर ध्यान देना चाहिए और ऐसे भड़काऊ बयान देने से बचना चाहिए.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Raihan

25 Sep 2025  ·  Published: 01:54 IST

Britain: यौन अपराध में विदेशी मूल के दोषियों की संख्या में भारी इजाफा, क्या कहते हैं आंकड़े?

क्राइम न्यूज ब्रिटेन

क्राइम न्यूज ब्रिटेन

ब्रिटिश सरकार के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार ब्रिटेन में यौन अपराधों के लिए सजा पाने वाले विदेशियों की संख्या में पिछले चार सालों में काफी बढ़त हुई है और इनमें भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है. साल 2021 और 2024 के बीच यौन अपराधों के लिए दोषी करार दिये गए विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या में 257 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इस अवधि के दौरान यौन अपराधों के लिए दोषी करार दिये गए विदेशी नागरिकों की संख्या में कुल 62 प्रतिशत की वृद्धि हुई. ये तथ्य ब्रिटेन के न्याय मंत्रालय के पुलिस राष्ट्रीय कंप्यूटर से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित हैं. इसके बाद, आव्रजन रोधी थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर माइग्रेशन कंट्रोल’ (सीएमसी) की ओर से इनका विश्लेषण किया गया. सीएमसी ने इस सप्ताह अपने विश्लेषण में कहा, ‘यौन अपराधों के लिए दोषी करार दिये गए विदेशी नागरिकों की संख्या 2021 और 2024 के बीच 62 प्रतिशत बढ़कर 687 से 1,114 हो गई.’

थिंक टैंक के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि के दौरान, इन अपराधों के लिए ब्रिटिश दोषसिद्धि दर में 39.31 प्रतिशत की वृद्धि हुई. 2021 से भारतीय इस चार्ट में सबसे ऊपर बने हुए हैं, जब ऐसे 28 आपराधिक मामले दर्ज किये गए थे. इसके बाद, 2022 में 53, 2023 में 67 और पिछले साल 100 आपराधिक मामले दर्ज किये गए.साल 2021 और 2024 के बीच यौन अपराध चार्ट में शीर्ष पांच देशों में, नाइजीरियाई नागरिकों के मामले 166 प्रतिशत, इराकियों के 160 प्रतिशत, सूडानी के 117 प्रतिशत और अफगान के 115 प्रतिशत बढ़े हैं. विश्लेषण में जिन अन्य दक्षिण एशियाई देशों को चिह्नित किया गया है, उनमें बांग्लादेशी शामिल हैं, जो उक्त चार साल की अवधि में 100 प्रतिशत वृद्धि के साथ छठें स्थान पर हैं. वहीं, पाकिस्तानी नागरिक 47 प्रतिशत वृद्धि के साथ 11वें स्थान पर हैं.

भारतीय मूल के लोग भी पीछे नहीं 

भारत को ब्रिटेन सरकार की उस विस्तारित सूची में शामिल किया गया था, जिसमें विदेशी अपराधियों को सजा सुनाये जाने पर उनकी अपील पर सुनवाई से पहले ही उन्हें निर्वासित कर दिया जाएगा. यह कदम ब्रिटेन में बढ़ते प्रवासन पर रोक लगाने के उपायों के तहत उठाया गया है.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

28 Aug 2025  ·  Published: 05:57 IST

शटर तोड़ प्रतिमा रखने से भड़का बवाल, नालंदा में पुलिस पर उपद्रवियों ने किया हमला

(फाइल फोटो)

(फाइल फोटो)

Nalanda News Today: नालंदा जिले के बिहारशरीफ में गुरुवार (28 अगस्त) को हालात उस समय बिगड़ गए जब पुलिस की टीम पर उपद्रवियों ने अचानक पत्थरबाजी शुरू कर दी. घटना में पुलिस बल के जमादार पप्पू कुमार घायल हो गए, जबकि कई जवानों को हल्की चोटें आईं. अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे.

'दुकान का ताला तोड़कर रख दी प्रतिमा'

दरअसल, पुलिस टीम बनौलिया मोहल्ले में एक महिला की शिकायत की जांच करने पहुंची थी. स्थानीय निवासी उर्मिला देवी ने आरोप लगाया था कि उनकी निजी दुकान का ताला तोड़कर उसमें से सामान लूट लिया गया और फिर जबरन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर दी गई. महिला ने आरोप लगाया कि बनौलिया निवासी नीरज चौरसिया और उमेश गोप समेत कुछ लोगों ने उनकी दुकान का शटर तोड़कर कब्जे की कोशिश की.

उर्मिला देवी का कहना है कि यह दुकान उनकी निजी संपत्ति है और लंबे समय से उनके परिवार के उपयोग में रही है. इससे पहले भी इस दुकान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो चुका था. करीब एक हफ्ते पहले पुलिस की मध्यस्थता से दोनों पक्षों में समझौता कराया गया था, लेकिन गुरुवार को मामला फिर से बिगड़ गया और तनाव फैल गया.

पत्थरबाजी में पुलिस घायल, साजिश की आशंका

डीएसपी नूरुल हक ने बताया कि पुलिस टीम दोनों पक्षों को समझाने और जांच करने के लिए मौके पर पहुंची थी. इसी दौरान एक पक्ष के लोग अचानक उग्र हो गए और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया. डीएसपी ने कहा कि उपद्रव सुनियोजित तरीके से किया गया था. हालांकि पुलिसकर्मियों ने किसी तरह हालात को काबू में किया और स्थिति को बिगड़ने से रोका.

इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

घटना के बाद पूरे बनौलिया इलाके में तनाव फैल गया. किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी है. एसडीओ के आदेश पर बिहारशरीफ सीओ को मामले की विस्तृत जांच का जिम्मा सौंपा गया है. पुलिस ने उपद्रवियों की पहचान शुरू कर दी है और उनके खिलाफ नामजद व अज्ञात प्राथमिकी दर्ज की जा रही है.

डीएसपी नूरुल हक ने सख्त चेतावनी दी कि कानून को हाथ में लेने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी कर उन्हें जेल भेजा जाएगा.घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी गई. उनका कहना है कि अगर प्रशासन ने पहले ही इस विवाद पर सख्त कदम उठाया होता तो गुरुवार की घटना नहीं होती. हालांकि फिलहाल पुलिस की तैनाती के चलते स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है.

यह भी पढ़ें: झारखंड हाईकोर्ट में IAS अधिकारी पर बरसी कड़ी फटकार, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Raihan

28 Aug 2025  ·  Published: 23:53 IST

बिहार में वोट नहीं, जाति गिनी जाती है? यही फॉर्मूला नेताओं को बनाता है बेकाम का 'बादशाह'

बिहार में वोट नहीं, जाति गिनी जाती है

बिहार में वोट नहीं, जाति गिनी जाती है

बिहार में 'विकास बनाम पहचान' पर बहस हर बार चुनाव के दौरान लोग करते है, लेकिन जमीन पर उस हिसाब से सियासी समीकरण नहीं बदलते. जबकि मीडिया वाले भी इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं. इसके बावजूद, बिहार की राजनीति में यह धारणा आज भी पहले की तरह प्रभावी है कि 'जाति' से ही यह तय होगा, प्रदेश में किसकी बनेगी सरकार? MY (मुस्लिम यादव) से लेकर EBC (Mahadalit ब्लॉक)  सामाजिक न्याय, से लेकर जाति जनगणना तक, हर नैरेटिव का एंड एक ही सवाल पर होता है: कौन-सी जाति, किसके साथ, कितने प्रतिशत? 

यही वजह है कि बिहार में चुनाव आता है तो EVM से पहले एक्सेल खुलता है. सियासी पार्टियों की एक्सेल रो में जातियां, कॉलम में सीटों का विवरण होता है. चुनावी घोषणा पत्र में 'विकास' बोल्ड रहता है, पर वार रूम whiteboard पर सिर्फ 'कास्ट' ब्लॉक्स ही होता है. अब यह मामला मंडल बनाम कमंडल की लड़ाई से आगे बढ़कर नया इक्वेशन सेट कर रहा है. नया इक्वेशन यानी मंडल 2.0 प्लस वेलफेयर. यह नैरेटिव सोशल जस्टिस के नाम पर सेट होता है. अब सारा लब्बो लुआब यह है कि बिहार में वोट डाला है. जबकि जाति गिनी जाती है? ऐसा इसलिए कि बिहार की पॉलिटिक्स की पहचान यही है. 

कौन, किसके साथ? 

बिहार में सामाजिक न्याय की इस राजनीति ने हाशिए पर रहे तबकों को सत्ता तक पहुंचा दिया, लेकिन उसी पावर ने जाति समीकरण का नया बेस भी तैयार किया. इसका नतीजा यह निकला कि हर पार्टी की पहली चिंता यही होती है कि कौन-सा community किसके साथ है? 

जातीय मतदाताओं ने बदल ही पहचान 

साल 1990 के दशक की मंडल पॉलिटिक्स ने ओबीसी, ईबीसी और दलित प्रतिनिधित्व को मुख्यधारा में ला दिया. साल 2000 के बाद जाति समीकरण को साधना आसान नहीं रहा. ऐसा इसलिए कि बिहार में EBC (Extremely Backward Classes), महादलित, पसमांदा, सवर्ण वोट और अल्पसंख्यक वोटर्स ने अपनी अलग पहचान बना ली है. अब नेता सिर्फ 'MY' या 'सवर्ण बनाम दलित' जैसे जातीय समीकरण के भरोसे भी चुनाव नहीं जीत सकते,  बल्कि छोटी जातियों और उपजातियों तक का हिसाब सियासी दलों के नेता रखने लगे हैं. बिहार में मंडल और कमंडल के बाद सोशल इंजीनियरिंग 2.0 यही है.

विकास बनाम जाति झगड़ा नहीं, जुगलबंदी है

बहुत लोग मानते हैं कि जाति की राजनीति और कल्याणकारी राजनीति एक-दूसरे के विरोधी हैं, लेकिन बिहार में ये एक-दूसरे के पूरक हैं. यानी विकास करो पर, उसे उसकी जाति के नाम से पहचान दो.

किस जाति की आबादी कितनी?

बिहार जातीय जनगणना 2023 के मुताबिक राज्य में सबसे ज्यादा आबादी अति पिछड़े वर्ग की है. अब बिहार में सवर्ण एक तरह से काफी कम आबादी में सिमट गए हैं. आबादी के हिसाब से अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36.01 फीसदी है, जिसकी संख्या 4,70,80,514 है. पिछड़ा वर्ग 27.12 फीसदी है, जिनकी तादाद 3,54,63,936 है. जबकि अनुसूचित जाति के 19.6 प्रतिशत हैं, इनकी आबादी 2,56,89,820 है. अनुसूचित जनजाति की आबादी 21,99,361 है जो कि कुल आबादी का 1.68 प्रतिशत है. अनारक्षित यानी जनरल कास्ट, जिसे सवर्ण भी कह सकते हैं की आबादी 2 करोड़ 02 लाख 91 हजार 679 है, ये बिहार की कुल आबादी का 15.52 प्रतिशत है.

बिहार में मुसलमान- 17.70, यादव 14.26, कुर्मी 2.87, कुशवाहा - 4.21, ब्राह्मण- 3.65, भूमिहार- 2.86, राजपूत- 3.45, मुसहर- 3.08, मल्लाह- 2.60, बनिया- 2.31 और कायस्थ- 0.60 फीसदी कुछ आबादी में हिस्सेदारी है. 

 

जाति का विकल्प क्या है? 

बिहार में नैरेटिव सेट करने का रास्ता कास्ट को डिनाई करने में नहीं, उसे ग्लोरिफाइड कर पहचान देने में है. इसके साथ ही अब यह भी देखा जाने लगा है कि संबंधित जाति के लोगों की समृद्धि बढ़ी है या नहीं. या फिर दूसरों क तुलना में उसकी स्थिति क्या है? यानी जाति पहचान के उसकी समृद्धि को भी जोड़ दिया गया है. 


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

29 Jul 2025  ·  Published: 00:50 IST