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AAP को बड़ा झटका! 7 बार के विधायक शोएब इकबाल ने छोड़ी पार्टी, बोले - ‘तंग आकर इस्तीफा दे रहा हूं’

दिल्ली के मटिया महल से विधयक शोएब इकबाल

दिल्ली के मटिया महल से विधयक शोएब इकबाल

दिल्ली में एमसीडी उपचुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. चांदनी चौक से 7 बार विधायक रह चुके वरिष्ठ नेता शोएब इकबाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) से इस्तीफा देने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि वे पार्टी के  कार्यप्रणाली और नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और तंग आकर इस्तीफा दिया है. इकबाल ने यह भी आरोप लगाया कि आम आदमी पाटर्भ्पा अब जनता के मुद्दों से भटक चुकी है.

शोएब इकबाल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि निगम उपचुनाव में इलाके की सीट पर 'आप' ने आले इकबाल और शोएब इकबाल की मर्जी के बगैर उम्मीदवार का ऐलान कर दिया, जिससे शोएब इकबाल नाराज हो गए और इस्तीफा देने का फैसला लिया. उन्होंने कहा कि पार्टी की नीतियों से तंग आकर इस्तीफा दे रहे हैं.

जनता की उम्मीदों पर खर नहीं उतरी आप

शोएब इकबाल ने नाराजगी जताते हुए कहा, ''आम आदमी पार्टी दिल्ली के लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाई और पार्टी की नीतियों से तंग आकर मैं इस्तीफा दे रहा हूं. अब उनका आम आदमी पार्टी से कोई नाता नहीं है और कभी भी AAP से संबंध नहीं रहेगा.''

 7 बार के विधायक हैं शोएब इकबाल

दिल्ली के मटिया महल विधानसभा क्षेत्र के शोएब इकबाल सात बार विधायक रहे हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में शोएब ने AAP टिकट पर मटिया महल से चुनाव में जीत हासिल की थी, लेकिन 2025 के चुनावों के लिए पार्टी ने उनके बेटे आले इकबाल को टिकट दिया था और जीत भी हासिल की थी. शोएब इकबाल का कहना है कि एमसीडी उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा में पार्टी ने स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान नहीं किया.

दिल्ली नगर निगम की 12 सीटों पर 30 नवंबर 2025 को उपचुनाव होने हैं. प्रत्याशियों के नामांकन की प्रक्रिया 3 नवंबर से शुरू हो गई है. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 10 नवंबर है. वहीं 3 दिसबंर को उपचुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे.


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Written by: Dhirendra Mishra

10 Nov 2025  ·  Published: 07:13 IST

‘पाग विवाद’ से सुलगी सियासत, मैथिली ठाकुर पर आरजेडी बोली - जनता देगी जवाब

पाग विवाद में फंसी लोक गायिका मैथिली ठाकुर

पाग विवाद में फंसी लोक गायिका मैथिली ठाकुर

बिहार के मिथिला क्षेत्र में सांस्कृतिक प्रतीक ‘पाग’ को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है. मैथिली गायिका मैथिली ठाकुर के एक वीडियो में कथित तौर पर पाग को फेंकने का आरोप लगा है, जिस पर आरजेडी ने उन्हें घेर लिया है. पार्टी ने इसे मिथिला और उसकी अस्मिता का अपमान बताया है. वहीं, मैथिली ठाकुर के समर्थकों ने इसे गलत व्याख्या बताया है. सोशल मीडिया पर यह मामला अब सांस्कृतिक से ज्यादा राजनीतिक रूप लेता जा रहा है. आरजेडी ने मैथिली और बीजेपी पर हमला बोल दिया है. 

इस विवाद ने अब सांस्कृतिक और भावनात्मक मोड़ ले लिया है. यहां इस बात का जिक्र कर दें कि मिथिलांचल में पाग सम्मान का प्रतीक है. अब वहां के लोग 'पाग के सम्मान' की रक्षा की बात कर रहे हैं.

क्या है ‘पाग विवाद’?

दरअसल, हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें मैथिली ठाकुर को मखाना खाते हुए और उनके पास रखे मिथिला पाग को लेकर हल्के अंदाज में पेश आते देखा गया. इसके बाद अभिनेत्री केतकी सिंह ने एक लाइव वीडियो में मैथिली ठाकुर पर आरोप लगाया कि उन्होंने ‘मिथिला पाग’ जैसी सम्मान की निशानी को अपमानित किया.

केतकी ने क्या कहा?

उत्तर प्रदेश की बांसडीह सीट से बीजेपी विधायक केतकी सिंह अलीनगर विधानसभा क्षेत्र में मैथिली ठाकुर के समर्थन में जनसभा को संबोधित करने पहुंची थी. उन्होंने कहा है कि मिथिला पाग हमारी अस्मिता, गौरव और सम्मान का प्रतीक है. इसे सिर पर धारण किया जाता है. यह किसी सजावट या सामान्य कपड़े की वस्तु नहीं. उन्होंने इसके लिए मैथिली ठाकुर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की.

मैथिली ठाकुर ने पेश की सफाई

इस विवाद के बाद मैथिली ठाकुर ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उनका किसी की भावना आहत करने का कोई इरादा नहीं था. उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘पाग’ का हमेशा सम्मान किया है और वह मिथिला की संस्कृति की राजदूत के रूप में काम करती रही हैं.

क्यों छिड़ा विवाद?

इस मामले ने उस समय विवाद का रूप धारण कर लिया जब अब सोशल मीडिया पर ‘#PaghControversy’ और ‘#MaithiliThakur’ जैसे हैशटैग के साथ ट्रेंड करने लगा है. उसके बाद क्या था, लोग दो गुटों में बंट गए हैं. एक पक्ष मैथिली ठाकुर का समर्थन कर रहा है, तो दूसरा उनके खिलाफ आक्रोश जता रहा है.

पाग का अपमान बर्दाश्त नहीं 

वहीं अब इस पूरे मामले पर सियासत भी गर्म हो गई है. राजद प्रत्याशी विनोद मिश्रा ने केतकी सिंह और बीजेपी दोनों पर निशाना साधते हुए कहा, 'मिथिला की शान पाग का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. अलीनगर की जनता इस अपमान का जवाब जरूर देगी.'
 
राजद प्रत्याशी विनोद मिश्रा ने आगे कहा हम मैथिली ठाकुर के स्वर और गायकी के प्रशंसक हैं, लेकिन राजनीति की दुनिया में वो नई हैं. अलीनगर की जनता राजनीति की पाठशाला में उन्हें सबक सिखाकर ही भेजेगी.

पाग पर विवाद बढ़ता देख खुद बीजेपी विधायक केतकी सिंह सामने आईं और सफाई दी. उन्होंने सिर पर पाग पहनकर मीडिया से कहा, 'मेरी किसी भी तरह से मिथिला पाग का अपमान करने की मंशा नहीं थी. विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए इस बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है.'

उन्होंने आगे कहा, 'पाग का मेरे लिए भी उतना ही सम्मान है जितना किसी और के लिए... लेकिन समाज में हर बेटी का भी उतना ही सम्मान होना चाहिए जितना इस पाग का है...' मैथिली ठाकुर ने अपने सुरों से पूरे विश्व में मिथिला का नाम रोशन किया है, इसलिए उनका भी उतना ही सम्मान होना चाहिए..

मिथिला की परंपरा का उड़ाया मजाक 

इधर मामला शांत भी नहीं हुआ था कि एक और वीडियो ने आग में घी डाल दिया... इस बार खुद मैथिली ठाकुर का एक वीडियो वायरल हो गया. वीडियो में वो मिथिला की वही पाग को कटोरे की तरह इस्तेमाल करती दिखीं. उसमें मखाना खाते हुए बस, फिर क्या था. लोगों ने इस वीडियो को भी मिथिला की परंपरा का मजाक उड़ाना करार दिया. 

क्या है 'मिथिला पाग' का महत्व?

मिथिला पाग केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि यह मिथिलांचल की संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान का प्रतीक है. इसे सम्मानित व्यक्ति, विद्वान या अतिथि को आदर के रूप में पहनाया जाता है. पाग को अपमानित करना मिथिलांचल की अस्मिता से जुड़ा मसला माना जाता है. चूंकि बिहार में चुनाव प्रचार का दौर चल रहा है. केतकी सिंह मिथिल के अलीनगर में चुनावी संभा को संबोधित करने पहुंची थी, वहीं की ये घटना है, जो पाग के अपमान से जुड़ा है. इसलिए यह विवाद का विषय बन गया है. 


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Written by: Dhirendra Mishra

25 Oct 2025  ·  Published: 07:05 IST

भारत और चीन की मुश्किलें बढ़ाएगा ट्रंप का 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल', मस्क की परेशानी समेत 10 प्वांट्स में जानें सब कुछ

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका की सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का "वन बिग ब्यूटीफुल बिल" को गुरुवार को पास कर दिया है. बिल पास होने के बाद इसको लेकर अमेरिका सहित दुनिया भर में बहस छिड़ी हुई है. जहां रिपब्लिकन इसे 'परिवार और विकास' वाला बिल बता रहे हैं वहीं डेमोक्रेट्स ने इसे पूंजीपतियों के हित वाला बिल करार दिया है. विरोधियों का कहना है कि अमेरिका पर अगले 10 साल में 3.3 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज बढ़ेगा.

सवाल यह है कि आखिर क्या है यह बिल जिसे पास कराने के लिए ट्रंप काफी बेताब थे? इस बिल में क्या-क्या आर्थिक प्रावधान हैं? इससे किसे फायदा  मिलेगा और किसे नुकसान होगा? 10 बातों में प्वाइंट में समझिए सब कुछ

1. वन बिक ब्यूटीफुल बिल का पहला लाभ यह होगा कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में जो इनकम टैक्स में कटौती की थी, वो अब स्थायी हो गई है. अमेरिका में टिप और ओवरटाइम से मिलने वाले पैसे पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. यह टैक्स कटौती साल 2028 तक ही जारी रहेगा. 

2.  वन बिग ब्यूटीफुल बल लागू होने ट्रंप प्रशासन पर से रिसर्च और डेवलपमेंट पर वाले खर्चों में तुरंत कटौती करने की इजाजत मिल जाएगी. अमेरिका में रहने वाले प्रवासियों पर एक्शन पर होगा. अमेरिका के बॉर्डर पर दीवार बनाए जाएंगे. 

3. अवैध प्रवासियों को हिरासत में रखने के लिए 100,000 बिस्तरों वाली फैसिलिटी (जेल की तरह) बनाने के लिए $45 बिलियन खर्च होंगे. अवैध प्रवासियों को पकड़ने के लिए 10 हजार आव्रजन और इमिग्रेशन एंड कस्टम्स इंफोर्समेंट अधिकारियों को नियुक्त करने के लिए नया फंड मिलेगा. अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश करते पकड़े गए प्रवासियों के लिए  जुर्माने का प्रावधान है. 

4. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन जिस क्लीन एनर्जी टैक्स क्रेडिट लेकर आए थे, उसको रद्द कर दिया गया है. नई पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अमेरिकी की फेडरल सरकार से मिलने वाली सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा. 

5. 30 सितंबर 2025 के बाद इलेक्ट्रिसिटी से चलने वाली गाड़ियों (EV) की खरीद के लिए 7500 डॉलर का टैक्स क्रेडिट खत्म कर दिया गया है. इससे ट्रंप ने टेस्ला के सीईओ एलन मस्क को निशाने पर लिया है. अमेरिका की उधार (लोन) लेने की सीमा को बढ़ाकर 5 ट्रिलियन डॉलर तक कर दिया गया है.

6. ट्रंप प्रशासन ने इस बिल के जरिए गरीबों और विकलांगों के कल्याण पर खर्च होने वाले फंड पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. अब 65 साल से कम आयु के सक्षम व्यक्तियों और जिनके छोटे बच्चे नहीं हैं, उन्हें मेडिकल या एसएनएपी प्राप्त करने के लिए हर महीने कम से कम 80 घंटे काम करना होगा. अमेरिका के गांवों के हॉस्पिटल्स को आर्थिक सहायता मुहैया कराने के लिए $50 बिलियन का पांच-वर्षीय फंड बनाया गया है. 

7. प्लान्ड पैरंटहुड नाम के संगठन के लिए अमेरिका की फेडरल सरकार से मिलने वाली फंडिंग को एक साल के लिए रोका दिया गया है. प्लान्ड पैरंटहुड अमेरिका में एक राष्ट्रव्यापी महिला स्वास्थ्य संगठन है जो अक्सर गर्भपात के मुद्दे को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के टारगेट पर होता है. अमेरिका में नवजात शिशुओं के जन्म लेने पर उनके नाम पर $1,000 डालकर एक सेविंग अकाउंट खोला जाएगा. इन अकाउंट का नाम "ट्रंप अकाउंट्स" होगा. 

8. डोनाल्ड ने ऐलान किया था कि अमेरिका भी इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम, ‘आयरन डोम' की तर्ज पर उससे भी एडवांस ‘गोल्डन डोम' बनाएगा. अब ट्रंप की इस पहल को 25 अरब डॉलर का फंड दिया गया है.

9. अमेरिका के स्पेस प्रोग्राम को बढ़ावा दिया गया है. मंगल ग्रह पर मिशन के लिए 10 बिलियन डॉलर दिया गया है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को रिटायरमेंट के बाद बंद करने के लिए 325 मिलियन डॉलर मिलेंगे. अमेरिका के धनी विश्वविद्यालयों पर नया टैक्स लगाया गया है.

10. इस बिल की वजह से अमेरिका पर कर्ज बढ़ने से डॉलर की वैल्यू पर दबाव बनेगा. जिसके चलते भारत समेत कई देशों की करेंसी में गिरावट आ सकती है. क्लीन एनर्जी में निवेश घटा तो वैश्विक तकनीक और इन्वेस्टमेंट फ्लो प्रभावित होगा, जिसका सीधा असर भारत के सोलर विंड प्रोजेक्ट्स पर पड़ सकता है. EV चिप्स और बैटरी सामग्री की मांग घटने से चीन-भारत की सप्लाई चेन पर भी असर पड़ेगा। इससे भारत को नया मार्केट खोजना पड़ सकता है. 


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Written by: Dhirendra Mishra

04 Jul 2025  ·  Published: 18:16 IST

गजब है! अब समोसा और जलेबी भी नहीं खा सकते आप, यहां के एम्स ने  जारी की स्लो डेथ की चेतावनी

समोसा भी खतरनाक

समोसा भी खतरनाक

गर्मा-गरम समोसा, चाशनी में भीगी हुई जलेबी सुनते ही हर भारतीय के मुंह में पानी आ जाता है. बारिश के इस मौसम मे लोग इसे और ज्यादा चाव से खाते हैं. अब यही स्वाद बन सकता है ‘स्लो डेथ’ का कारण! जी हां, जो चीजें हमारी थाली की शान थीं, अब उनके खिलाफ स्वास्थ्य चेतावनी जारी होने की बातें हो रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार के एक प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान ने डीप फ्राइड और हाई शुगर फूड्स को तंबाकू जैसी 'स्लो पॉइजनिंग' कैटेगरी में रखने की सिफारिश की है. 

संस्थान के उक्त फैसले के बाद समोसे–जलेबी पर भी “खाने से जान को खतरा है” जैसे चेतावनी स्टिकर चिपक सकते हैं. ये चेतावनी सिर्फ स्वाद के खिलाफ नहीं बल्कि उस लाइफस्टाइल के खिलाफ है, जो हमें धीरे-धीरे बीमार बना रही है. अहम सवाल ये है - क्या सच में समोसे-जलेबी जानलेवा हैं? या फिर ये चेतावनी सेहत के नाम पर ‘जिंदगी से स्वाद छीनने’ की एक और कोशिश है?

एम्स नागपुर जैसे केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों को कैफेटेरिया और सार्वजनिक स्थानों पर स्पष्ट "तेल और चीनी" वाले बोर्ड लगाने का निर्देश दिया गया है. बढ़ते मोटापे से निपटने के लिए, स्वास्थ्य मंत्रालय ने समोसे और जलेबी जैसे तले हुए स्नैक्स के लिए स्वास्थ्य चेतावनी जारी करने का आदेश दिया है - सिगरेट के पैकेटों की तरह.

टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार एम्स नागपुर जैसे केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों को कैफेटेरिया और सार्वजनिक स्थानों पर स्पष्ट 'तेल और चीनी' वाले बोर्ड लगाने का निर्देश दिए गए हैं. ये पोस्टर लोकप्रिय खाद्य पदार्थों में वसा और चीनी की मात्रा को दर्शाएंगे. सिगरेट पर स्वास्थ्य चेतावनी लेबल की तरह काम करेंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि जलेबी और समोसा उच्च कैलोरी, तले हुए और चीनी से भरपूर खाद्य पदार्थों में शामिल है, जिन्हें आधिकारिक स्वास्थ्य चेतावनी सूची में शामिल किया जाएगा.

ऐसा करना अहम क्यों? 

यह कदम भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच उठाया गया है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ चीनी और ट्रांस वसा को मोटापे, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के प्रमुख कारणों में से एक बताते हैं. अनुमानों के अनुसार 2050 तक 44.9 करोड़ से ज्यादा भारतीय अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हो सकते हैं, जिससे देश दुनिया में मोटापे का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बन जाएगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कोई प्रतिबंध नहीं है. इस अभियान का मकसद जनता को जानकारी प्रदान करना है, न कि पारंपरिक स्नैक्स पर प्रतिबंध लगाना है. 


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Written by: Dhirendra Mishra

14 Jul 2025  ·  Published: 19:08 IST