जेमिमा रोड्रिग्स
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की युवा बल्लेबाज जेमिमा रोड्रिग्स ने एक बार फिर अपने खेल से सबका दिल जीत लिया. उन्होंने शानदार पारी खेलते हुए न सिर्फ टीम को जीत दिलाई बल्कि एक खास रिकॉर्ड भी अपने नाम किया. मैच के बाद उन्होंने कहा . “बीते चार महीने मेरे लिए बेहद कठिन थे, लेकिन अब सब कुछ सार्थक लग रहा है.”
गुरुवार को उन्होंने सबसे शानदार पारी खेली. इस दौरान कई रिकॉर्ड अपने नाम किए. मैच के बाद जब उनसे भावनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा - “बीते चार महीने बेहद कठिन रहे. इंजरी, फॉर्म और सिलेक्शन को लेकर बहुत कुछ झेलना पड़ा, लेकिन परिवार, कोच और टीम के सपोर्ट से मैं यहां तक पहुंच पाई हूं.”
#JemimahRodrigues ट्रेंडिंग
जेमिमा ने यह भी कहा कि यह जीत सिर्फ उनकी नहीं बल्कि पूरे देश और उन तमाम खिलाड़ियों की है जो मुश्किल वक्त में भी हार नहीं मानते. उनकी इस पारी के बाद सोशल मीडिया पर #JemimahRodrigues और #ProudMoment ट्रेंड कर रहे हैं.
क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने उनकी तकनीक और संयम की तारीफ करते हुए कहा कि जेमिमा भारतीय महिला क्रिकेट की 'राइजिंग आइकन' बन चुकी हैं.
मम्मी-पापा और कोच का जताया आभार
मैच का श्रेष्ठ खिलाड़ी चुने जाने के बाद जेमिमा ने कहा, "सबसे पहले, मैं यीशु का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, क्योंकि मैं यह सब अकेले नहीं कर सकती थी. मुझे पता है कि उन्होंने आज मुझे इस मुश्किल दौर से निकाला. मैं अपनी मां, पिताजी, कोच और हर उस व्यक्ति का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, जिन्होंने इस दौरान मुझ पर विश्वास किया. पिछले चार महीने वाकई बहुत मुश्किल रहे, लेकिन यह एक सपने जैसा लग रहा है और अभी तक पूरी तरह से साकार नहीं हुआ है."
दरअसल, भारत को जीत के लिए ऑस्ट्रेलिया ने 339 रन का लक्ष्य दिया था. भारतीय टीम 59 पर मंधाना और शेफाली का विकेट गंवाकर मुश्किल में थी. तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आईं जेमिमा रोड्रिग्स ने 134 गेंद पर 14 चौकों की मदद से नाबाद 127 रन की पारी खेली और टीम की जीत में यादगार भूमिका निभाई.
इंडियन क्रिकेट टीम ने बनाया रिकॉर्ड
रोड्रिग्स को कप्तान हरमनप्रीत कौर का भी अच्छा साथ मिला. हरमन ने 88 गेंद पर 89 रन की पारी खेली और तीसरे विकेट के लिए रोड्रिग्स के साथ 167 रन की मैच विनिंग साझेदारी की. दीप्ति शर्मा ने 24, ऋचा घोष ने 26 और अमनजोत कौर ने नाबाद 15 रन बनाए. शेफाली 10 और मंधाना 24 रन बनाकर आउट हुई थीं. भारत ने 48.3 ओवर में 5 विकेट पर 341 रन बनाकर मैच 5 विकेट से जीता. इससे पहले महिला वनडे क्रिकेट में 331 सबसे बड़ा हासिल किए जाने वाला लक्ष्य था. 339 रन का लक्ष्य हासिल कर भारतीय टीम ने नया रिकॉर्ड बना दिया है.
करिश्मा कपूर, संजय कपूर और रणधीर कपूर
Randhir Kapoor Against Karisma-Sunjay Marriage: साल 2002 में करिश्मा कपूर की सगाई अभिषेक बच्चन से हुई थी. दोनों की शादी का इंतजार कर रहे थे लेकिन अचानक सगाई टूट गई. एक साल बाद 2003 में करिश्मा ने दिल्ली के बिजनेसमैन संजय कपूर से शादी कर ली. इस जोड़ी के दो बच्चे एक बेटी समायरा और एक बेटा हुए.
करिश्मा और संजय की शादी कई कारणों से टिक नहीं पाई. करिश्मा कपूर ने संजय पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया थे. जबकि संजय ने आरोप लगाया था कि एक्ट्रेस ने केवल पैसों के लिए उससे शादी की थी. क्या आप जानते हैं कि करिश्मा कपूर के पिता रणधीर कपूर एक्ट्रेस की संजय कपूर संग शादी के खिलाफ थे.
रणधीर ने संजय को कहा था थर्ड क्लास आदमी
बात 2016 की है. रणधीर कपूर ने एक इंटरव्यू में संजय पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह एक थर्ड क्लास आदमी है. हर कोई हमारी साख जानता है. हम कपूर हैं. हमें किसी के पैसे के पीछे भागने की जरूरत नहीं है. हमें न केवल पैसे का आशीर्वाद मिला है, बल्कि हमारा हुनर हमें जीवन भर सहारा दे सकता है."
रणधीर कपूर ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही इस शादी का विरोध किया था. उन्होंने कहा, "मैं कभी नहीं चाहता था कि करिश्मा उनसे शादी करें. उन्होंने कभी अपनी पत्नी की परवाह नहीं की. वह उससे धोखा करते रहे हैं और दूसरी महिला के साथ रह रहे हैं.
त्रिपुरा में तीन बांग्लादेशी पशु तस्कर की मौत.
भारत-बांग्लादेश सीमा एक बार फिर चर्चा में है. त्रिपुरा में शुक्रवार रात हुई मुठभेड़ में तीन बांग्लादेशी पशु तस्कर मारे गए. घटना के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने त्रिपुरा सरकार और सीमा सुरक्षा बल (BSF) से सुरक्षा बढ़ाने और स्थिति पर करीबी नजर रखने को कहा है. इस घटना के बाद त्रिपुरा-बांग्लादेश सीमा पर तीन बांग्लादेशी पशु तस्करों की हत्या के बाद से दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण है.
भारत ने ढाका से सीमा सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने की अपील की है, वहीं बांग्लादेश ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है. दोनों देशों के बीच सीमा पर बढ़ती तस्करी और गोलीबारी की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है.
विदेश मंत्रालय (MEA) ने 17 अक्टूबर को भारतीय ग्रामीणों के साथ झड़प में तीन बांग्लादेशी नागरिकों की हत्या सख्त नाराजगी जाहिर की है. विदेश मंत्रालय की ओर से इसको लेकर जारी एक बयान में कहा है कि बांग्लादेश की सरकार अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए जरूरी कदम तत्काल उठाए. इस घटना पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.
रणधीर जायसवाल ने आगे कहा कि बांग्लादेश को सीमा पार अपराधों और तस्करी को रोकने के लिए आवश्यक पहल करने की जरूरत है. वहां की सरकार को सीमा पर बाड़ लगाने का समर्थन करना चाहिए. मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया बुधवार को त्रिपुरा के खोवाई जिले के बिद्याबिल नामक सीमावर्ती गांव में मवेशी चोरी होने के संदेह में गुस्साई भीड़ द्वारा तीन बांग्लादेशियों की हत्या के बाद आई है.
तस्करों ने ग्रामीणों पर चाकुओं से बोला था हमला
विदेश मंत्रालय ने कहा कि तीन बदमाशों ने अवैध रूप से अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार की और बिद्याबिल गांव से मवेशी चुराने का प्रयास किया. तीनों बांग्लादेशी नागरिकों ने कथित तौर पर स्थानीय ग्रामीणों पर लोहे के डंडों और चाकुओं से हमला कर, उन्हें घायल कर दिया और एक ग्रामीण की हत्या कर दी. जबकि अन्य ग्रामीण वहां पहुंच गए और हमलावरों का विरोध किया.
तनाव बढ़ने पर लोकल पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे, जहां दो तस्कर मृत पाए गए. तीसरे ने अगले दिन अस्पताल में दम तोड़ दिया. मंत्रालय ने आगे कहा कि तीनों बदमाशों के पार्थिव शरीर बांग्लादेशी पक्ष को सौंप दिए गए हैं. पुलिस ने मामला भी दर्ज कर लिया है.
स्थानीय लोगों के हवाले से बताया गया है कि यह घटना तब हुई जब दो ग्रामीण सीमा के पास एक रबर फार्म में काम कर रहे थे. उन्होंने तीन संदिग्ध व्यक्तियों को क्षेत्र से मवेशियों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा की ओर बढ़ते देखा. उन्होंने संदिग्ध चोरों का सामना किया. हालांकि, घुसपैठियों ने कथित तौर पर स्थानीय लोगों पर हमला कर दिया. इस बीच, गुस्साए स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए, संदिग्ध बांग्लादेशी चोरों का सामना किया और कथित तौर पर उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी.
बांग्लादेश ने दर्ज कराया विरोध
इस बीच ढाका ने त्रिपुरा में अपने तीन नागरिकों की हत्या की निंदा की घटना को एक 'घृणित कृत्य' और 'मानवाधिकारों एवं कानून के शासन का गंभीर उल्लंघन' करार दिया. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, "बांग्लादेश सरकार 15 अक्टूबर 2025 को भारत के त्रिपुरा में भीड़ द्वारा तीन बांग्लादेशी नागरिकों की क्रूर पिटाई और हत्या का कड़ा विरोध और निंदा करती है."
अरुंधति रॉय और सीएम उमर अब्दुल्ला
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अरुंधति रॉय और खालिदा नूरानी समेत कई लेखकों की 25 किताबों को किया बैन कर दिया है. इन लेखकों पर आरोप है कि ये किताबें आतंकवाद को महिमामंडित करती हैं और अलगाववाद को हवा देती हैं. अब सवाल ये है कि 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' की आड़ में देशद्रोह कितनी दूर तक जायज़ है?"
सीएम उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार ने मौलाना मौदादी, अरुंधति रॉय, एजी नूरानी, विक्टोरिया स्कोफील्ड और डेविड देवदास जैसे प्रसिद्ध लेखकों की किताबों सहित 25 किताबों के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगा दिया है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इन किताबों को "झूठे आख्यानों को बढ़ावा देने और आतंकवाद का महिमामंडन करने" के आरोप में जब्त किया गया है. यह आदेश सरकार के गृह विभाग द्वारा जारी किया गया है.
किन-किन पुस्तकों पर लगे बैन?
जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा प्रतिबंधित पुस्तकों में इस्लामी विद्वान और जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक मौलाना मौदादी की 'अल जिहादुल फिल इस्लाम', ऑस्ट्रेलियाई लेखक क्रिस्टोफर स्नेडेन की 'इंडिपेंडेंट कश्मीर', डेविड देवदास की 'इन सर्च ऑफ अ फ्यूचर (द स्टोरी ऑफ़ कासिमिर)', विक्टोरिया स्कोफील्ड की 'कश्मीर इन कॉन्फ्लिक्ट (इंडिया, पाकिस्तान एंड द अनएंडिंग वॉर)', एजी नूरानी की 'द कश्मीर डिस्प्यूट (1947-2012)' और अरुंधति रॉय की 'आजादी' शामिल हैं.
जम्मू-कश्मीर सरकार दावा
सीएम उमर अब्दुल्ला सरकार ने दावा किया है कि कुछ साहित्य जम्मू-कश्मीर में किताबों के जरिए आतंकवाद और अलगाववाद का प्रचार करते हैं." आदेश में कहा गया है कि यह साहित्य शिकायत, नागरिकों के पीड़ित होने और आतंकवादी वीरता की संस्कृति को बढ़ावा देकर युवाओं की मानसिकता पर गहरा प्रभाव डालने वाला है. साथ ही, यह भारत के खिलाफ "युवाओं को गुमराह करने, आतंकवाद का महिमामंडन करने और हिंसा भड़काने" में अहम भूमिका निभाता है.
आदेश में ये भी कहा गया है कि जांच और विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर आधारित उपलब्ध साक्ष्य "स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं" कि हिंसा और आतंकवाद में युवाओं की भागीदारी के पीछे एक महत्वपूर्ण कारक "झूठे आख्यानों और अलगाववादी साहित्य का व्यवस्थित प्रसार रहा है, जो अक्सर ऐतिहासिक या राजनीतिक टिप्पणियों के रूप में प्रच्छन्न कर आंतरिक रूप से प्रसारित होता है.
उमर अब्दुल्ला सरकार की ओर से जारी में ये भी कहा गया है, "इस साहित्य ने जम्मू-कश्मीर में युवाओं के कट्टरपंथीकरण में जिन तरीकों से योगदान दिया है, उनमें ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ना, आतंकवादियों का महिमामंडन, सुरक्षा बलों का अपमान, धार्मिक कट्टरपंथ, अलगाववाद को बढ़ावा देना, हिंसा और आतंकवाद का मार्ग प्रशस्त करना आदि शामिल हैं."
25 पुस्तकों की पहचान की गई है जो जम्मू-कश्मीर में "झूठे आख्यान और अलगाववाद" का प्रचार करती हैं और उन्हें "अवैध" घोषित करने की आवश्यकता है। आदेश में कहा गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 98 के अनुसार इन्हें "ज़ब्त" किया जाता है। इसमें कहा गया है कि पहचानी गई 25 पुस्तकें "अलगाववाद को भड़काने वाली और भारत की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने वाली" पाई गई हैं, इसलिए इन पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 152, 196 और 197 के प्रावधान लागू होते हैं।
"भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, जम्मू और कश्मीर सरकार एतद्द्वारा 25 पुस्तकों और उनकी प्रतियों या अन्य दस्तावेज़ों के प्रकाशन को सरकार के अधीन ज़ब्त करने की घोषणा करती है-"