पीएम मोदी ने प्रतीका रावल को खाना सर्व किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक मानवीय पहलू एक बार फिर सामने आया. यह मामला उस समय की है जब पीएम अपने सरकारी आवास पर विश्व विजेता महिला क्रिकेट टीम को मिले और उन्हें एक भोज दिया. विजेता महिला टीम से जब वो मिले तो उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठी प्रतीका रावल को अपने हाथों से भोजन परोसा. इस सादगी और सम्मान भरे पल ने करोड़ों भारतीयों के दिलों को छू लिया. तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं.
महिला विश्व कप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के सम्मान समारोह के दौरान घायल खिलाड़ी प्रतीका रावल को खुद खाना सर्व किया. इस दौरान पीएम ने उनसे बातचीत की, उनके जीवन की प्रेरक कहानी सुनी और उनका हौसला बढ़ाया। कार्यक्रम में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 2017 की मुलाकात को याद करते हुए ट्रॉफी लाने पर गर्व जताया. जबकि पीएम मोदी ने क्रिकेट की एकता और भावनात्मक जुड़ाव की बात की.
सोशल मीडिया पर जब यह तस्वीरें आईं, तो हर कोई इस मानवीय पहलू की तारीफ करने लगा. ट्विटर और इंस्टाग्राम पर #PMModi #PratikaRawal #HumanityInService जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे. लोगों ने लिखा - “यह सिर्फ एक प्रधानमंत्री नहीं, एक सेवक की भावना है.” इस घटना ने लोगों को फिर याद दिलाया कि नेतृत्व सिर्फ सत्ता नहीं, संवेदना और सहानुभूति का नाम है.
क्या है पूरा मामला?
गुरुवार को महिला विश्व कप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के सम्मान समारोह के दौरान
प्रधानमंत्री मोदी ने जब देखा कि घायल खिलाड़ी प्रतीका रावल, जो व्हीलचेयर पर बैठी थीं, उनके पास खाने की थाली नहीं थी. तो प्रधानमंत्री ने तुरंत खुद पहल की और वे सर्विंग एरिया तक गए, खाना उठाया और खुद जाकर प्रतीका को परोसा.
इस क्षण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी का खिलाड़ियों के प्रति मानवीय जुड़ाव और विनम्रता साफ झलक रही थी.
कोच और सपोर्टिंग स्टाफ भी रहा मौजूद
प्रधानमंत्री के आवास पर आयोजित इस सम्मान समारोह में विश्व कप विजेता टीम के साथ मुख्य कोच अमोल मजूमदार और बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मनहास भी मौजूद थे. यह मुलाकात न केवल औपचारिक सम्मान का अवसर थी, बल्कि टीम और प्रधानमंत्री के बीच व्यक्तिगत कहानियों और अनुभवों के साझा होने का भी मौका बनी.
बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस की मानसिकता पर हमला बोला.
कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे द्वारा RSS पर बैन की मांग करने से सियासी माहौल गरम हो गया है. बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने इसे कांग्रेस की मानसिकता पर हमला बताते हुए कहा कि संघ देशभक्त संगठन है और इसे खत्म करने की कोशिश करने वाले हमेशा असफल रहे हैं.
आरएसएस पर कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे के बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है. खड़गे ने कहा कि संघ को बैन किया जाना चाहिए क्योंकि वह देश में नफरत फैलाने का काम करता है. इस पर बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने तीखा पलटवार करते हुए इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया और कहा कि जिन्होंने आरएसएस से टकराने की कोशिश की, उन्हें इतिहास ने कभी माफ नहीं किया.
कर्नाटक में मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे के बेटे प्रियांक खड्गे द्वारा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाले बयान ने तूल पकड़ लिया है. भाजपा ने इस पर तीखी आलोचना की है. वहीँ इसी कड़ी में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने इसे महज पब्लिसिटी स्टंट बताया और बोले इंदिरा गांधी ने भी आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की थ, लेकिन उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी थी. मुख्यमंत्री फडणवीस ने ये बात अमरावती में सोमवार को पत्रकारों के सवालों के जबाब में दिया. बोले ऐसे लोगों को कोई पूछता नहीं इसलिए इस तरह के बयान देते हैं.
देवेन्द्र फडणवीस का बयान
आरएसएस पर प्रतिबंध को लेकर पूछे गए सवाल पर फडणवीस ने कहा कि वह ऐसे बयान सिर्फ प्रचार के लिए देते हैं. इंदिरा गांधी ने भी ऐसा प्रयास किया था और उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी. उन्होंने आगे कहा कि हम ऐसे लोगों का जवाब तक नहीं देते. कोई उन्हें पूछता तक नहीं है.फडणवीस ने यह भी कहा कि आरएसएस एक देशभक्ति संगठन है और खरगे की राजनीति उनके पिता, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर निर्भर है. इसलिए उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है.
प्रियांक खड्गे ने क्या कहा था
प्रियांक खड़गे कर्नाटक की सरकार में आईटी और पंचायती राज्य मंत्री हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर राज्य में आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी. उन्होंने तर्क दिया था कि आरएसएस की संस्कृति भारत की एकता और धर्मनिरपेक्ष ढांचे के विरुद्ध है. उन्होंने विशेष आरएसएस सरकार और सरकार द्वारा संचालित स्कूलों, सार्वजनिक मैदानों, सरकारी मंदिरों, पुरातत्व विभाग के स्थलों, पार्कों और अन्य सरकारी परिसरों में अपनी शाखाएं और अन्य गतिविधियां चला रहा है.
वे नारों के माध्यम से और बच्चों एवं युवाओं के मन में नकारात्मक विचार डाले जा रहे हैं. ये सब संविधान और देश के नैतिक मूल्यों के खिलाफ हैं, इसलिए इस पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए. खड़गे बयान पर बीजेपी के कई और नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. माना जा रहा है कि अभी ये मुद्दा और गर्माएगा.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिंधी समाज के सम्मलेन में अपने विचार साझा किए कि भारत और सिंध का संबंध सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि सभ्य-संस्कृति के स्तर पर गहरा है. उन्होंने लाल कृष्णा आडवाणी का उद्धरण देते हुए कहा कि सीमाएं बदल सकती हैं और भविष्य में सिंध फिर भारत का हिस्सा बन सकता है. सिंह ने सिंधु नदी की पवित्रता पर भी प्रकाश डाला और यह कहा कि सिंध के लोग, चाहे वे पाकिस्तान में हों या कहीं और, “हमारे अपने” हैं. उन्होंने रोजगार और नागरिकता के मसले पर CAA की जरूरत पर भी जोर दियरक्षा मंत्री ने मोरक्को में भारतीय समुदाय से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) भारत को बिना किसी आक्रामक कदम के मिल जाएगा. उन्होंने कहा कि PoK में लोग खुद आवाजें उठाने लगे हैं और 'आजादी' की मांग कर रहे हैं.
इसी बीच उन्होंने पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी का जिक्र करते हुए कहा कि आज भले ही सिंध भारत का हिस्सा नहीं है, लेकिन सीमाएं कभी भी बदल सकती हैं और हो सकता है कि सिंध फिर भारत में लौट आए. एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने सिंध के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को याद किया.
उन्होंने कहा, "आज सिंध की जमीन भारत का हिस्सा भले न हो, लेकिन सभ्यता की दृष्टि से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा. और जहां तक जमीन का सवाल है, सीमाएं बदल सकती हैं। कौन जाने, कल सिंध फिर से भारत में आ जाए. मैं यहां लाल कृष्ण आडवाणी का भी जिक्र करना चाहूंगा. उन्होंने अपनी एक किताब में लिखा है कि सिंधी हिंदू, खासकर उनकी पीढ़ी के लोग, अभी भी सिंध के भारत से अलग होने को स्वीकार नहीं कर पाए हैं. सिर्फ सिंध में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में हिंदू सिंधु नदी को पवित्र मानते थे. सिंध के कई मुसलमान भी मानते थे कि सिंधु नदी का पानी मक्का के आब-ए-ज़मज़म से कम पवित्र नहीं है. यह आडवाणी का कथन है."
उन्होंने आगे कहा, "आज सिंध की जमीन भारत का हिस्सा भले न हो, लेकिन सभ्यता की दृष्टि से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा। और जहाँ तक जमीन का सवाल है, सीमाएँ बदल सकती हैं। कौन जाने, कल सिंध फिर से भारत में आ जाए। सिंध के हमारे लोग, जो सिंधु नदी को पवित्र मानते हैं, हमेशा हमारे अपने रहेंगे। चाहे वे कहीं भी हों, वे हमेशा हमारे रहेंगे."
आडवाणी ने साल 2017 में क्या कहा था?
देश के उपप्रधानमंत्री रहे आडवाणी ने 2017 में दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था, ‘‘मेरा मानना है कि सिंध के बिना भारत अधूरा लगता है.’’
बता दें, सिंध क्षेत्र 1947 के बंटवारे के बाद पाकिस्तान में चला गया था। वहां रहने वाले ज्यादातर सिंधी हिंदू भारत आ गए। राजनाथ सिंह ने कहा कि एलके आडवाणी ने अपनी किताब में लिखा है कि उनकी पीढ़ी के सिंधी आज भी सिंध के भारत से अलग होने को स्वीकार नहीं कर पाए हैं.
डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव कम होने के बजाय और ज्यादा बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा पहले घोषित 25 प्रतिशत से काफी अधिक टैरिफ लगाने की धमकी के बीच भारतीय निर्यातकों को अपने सबसे बड़े निर्यात बाजार अमेरिका तक पहुंच बनाए रखने में दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. एक ओर चीन ने दूसरे देशों को पछाड़ने के लिए कीमतों में काफी कटौती शुरू कर दी है तो दूसरी ओर 25 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ के अतिरिक्त जुर्माने ने अमेरिकी आयातकों और भारतीय निर्यातकों के बीच बातचीत को जटिल बना दिया है. खासकर परिधान और जूते जैसे कम मार्जिन वाले उत्पादों के मामले में.
इंडिया-यूएस के बीच रूसी तेल खरीदने पर "जुर्माने" को लेकर अनिश्चितता ऐसे समय में आई है जब भारतीय निर्यातकों को आमतौर पर अमेरिकी कारोबारियों से गर्मियों में सूती कपड़ों, हल्के जूतों और लिनेन के कपड़ों सहित थोक ऑर्डर मिलते हैं. आमतौर पर निर्यातक और आयातक अतिरिक्त टैरिफ का बोझ साझा करते हैं, लेकिन निर्यातकों का कहना है कि अज्ञात जुर्माने की राशि के कारण अनुबंध रुक गए हैं. यहां पर इस बात का जिक्र कर दें कि अमेरिका से भारत को निर्यात 3.46 लाख करोड़ का होता है. जबकि भारत से अमेरिका को निर्यात 7.35 लाख करोड़ रुपये का होता है.
ट्रंप ने दी टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी
इस मसले पर भारत का रवैया अमेरिकी पक्ष न देखकर सोमवार को तो ट्रंप ने सीएनबीसी के साथ एक साक्षात्कार में अगले 24 घंटों में भारत पर टैरिफ “काफी” बढ़ाने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि भारत अभी भी रूसी तेल खरीद रहा है. यह स्पष्ट नहीं है कि नई टैरिफ दर क्या होगी – या वह अब भारत द्वारा वर्षों से किए जा रहे उस कदम पर आपत्ति क्यों जता रहे हैं? हालांकि, यह नई धमकी तब आई है जब उन्होंने पिछले हफ्ते ही भारत से आने वाले सामान पर न्यूनतम 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी.
ट्रम्प का कहना है कि भारत अमेरिका से बहुत ज्यादा व्यापार करता है, लेकिन अमेरिका को भारत से उतना फायदा नहीं मिलता. इसलिए उन्होंने भारत पर 25% टैरिफ लगाने का फैसला किया है, यह 7 अगस्त 2025 से लागू हो जाएगा, लेकिन वे इस टैरिफ को अगले 24 घंटों के भीतर और बढ़ाने जा रहे हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार संतुलन नहीं है और भारत, रूस के साथ व्यापार करके यूक्रेन के खिलाफ रूसी वॉर मशीन को ईंधन देने का काम कर रहा है. इस वजह से अमेरिका को सख्त कदम उठाने की जरूरत है.
ट्रंप का रवैया गलत, इंडिया को निशाना बनाना तर्कहीन
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत ने इसका विरोध किया है और कहा है कि उसे गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और इस कदम को "अनुचित" बताया है.
ऐसे में भारत को निशाना बनाना अनुचित और तर्कहीन है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को निशाना बनाना गलत है. हम अपने राष्ट्रीय हितों के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे. इसके अलावा, विदेश मंत्री जयशंकर ने भी एक कार्यक्रम में कहा कि दुनिया की व्यवस्था में अब किसी एक का दबदबा नहीं चलेगा.
अमेरिका खुद खरीद रहा रूस से यूरेनियम - इंडिया
डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद भारत ने पहली बार अमेरिका का नाम लेकर खुलकर जवाब दिया. भारत ने रूस से अमेरिका और यूरोपीय यूनियन (EU) को होने वाले निर्यात का आंकड़ा जारी कर कहा कि अमेरिका अपनी न्यूक्लियर इंडस्ट्री के लिए रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री के लिए पैलेडियम, फर्टिलाइजर और केमिकल का इम्पोर्ट जारी रखे हुए है. यही हाल EU का है.
क्या है ट्रंप का टैरिफ वार?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 5 मार्च को अमेरिकी संसद के ज्वाइंट सेशन में दुनियाभर के देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया था. उन्होंने कहा था कि हमारी इकोनॉमी लगातार घाटे में जा रही है. इस नुकसान से बचने के लिए हम उन सभी देशों पर टैरिफ लगाएं, जो हमारे सामानों पर टैरिफ लगाते हैं. राष्ट्रपति ट्रम्प ने करीब एक महीने बाद 2 अप्रैल को भारत समेत 69 देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की. यह 9 अप्रैल से लागू होने वाला था, लेकिन ट्रम्प ने तब इसे टाल दिया. अमेरिकी प्रेसिडेंट ने कहा कि वे दुनियाभर के देशों को अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए 90 दिनों का वक्त दे रहे हैं.
31 जुलाई को समझौते की तारीख खत्म हो गई. इस दिन ट्रम्प ने 100 से ज्यादा देशों पर टैरिफ लगाया. जिन देशों ने अमेरिका के साथ समझौता किया, उन पर 10 से 20 प्रतिशत टैरिफ लगा और जिन देशों ने ऐसा नहीं किया, उन पर 25 से 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया. भारत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा, क्योंकि उसने ट्रम्प की शर्तें नहीं मानी.
चीन अमेरिका तीसरा सबसे बड़ा साझेदार
अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर सबसे ज्यादा घमासान मचा. मई में अमेरिका ने चीन पर 145 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था. इसके बाद चीन ने अमेरिका पर 125 प्रतिशत जवाबी टैरिफ लगा दिया. बाद में इसमें कमी आई. अभी अमेरिका ने चीन पर 30 प्रतिशत तो चीन ने अमेरिका पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है.
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार 2024 में अमेरिका और चीन के बीच कुल वस्तु व्यापार अनुमानित 582.4 अरब डॉलर का था. चीन को अमेरिकी वस्तुओं का निर्यात कुल 143.5 अरब डॉलर था. वहीं, चीन से अमेरिकी वस्तुओं का आयात कुल 438.9 अरब डॉलर था. नतीजा यह है कि पिछले साल चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 295.4 अरब डॉलर रहा, जो 2023 की तुलना में 5.8 प्रतिशत (16.3 अरब डॉलर) की बढ़ोतरी है. मेक्सिको और कनाडा के बाद चीन, अमेरिका का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, लेकिन अमेरिका धीरे-धीरे चीनी आयात से खुद को दूर कर रहा है.
अमेरिका, चीन से सिर्फ व्यापार संतुलन नहीं चाहता था. वह चाहता था कि चीन अपनी सरकारी कंपनियों को कम मदद दे. अमेरिका का मानना है कि चीन अपनी सरकारी कंपनियों को बहुत ज्यादा सब्सिडी देता है, जिससे दूसरे देशों की कंपनियां उनका मुकाबला नहीं कर पाती. अमेरिका की यह भी मांग है कि चीन टेक्नोलॉजी में विदेशी कंपनियों को ज्यादा मौका दे और और बौद्धिक संपत्ति के कानून (जैसे पेटेंट आदि) में बदलाव करे. चीन इसके लिए तैयार नहीं हुआ.