(फाइल फोटो)
West Bengal News Today: पश्चिम मिदनापुर जिले के खेजुरी क्षेत्र की गढ़ाहार सहकारी समिति के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सभी 9 सीटों पर जीत दर्ज की. सुबह से ही चुनाव को लेकर इलाके में तनाव और अशांति का माहौल बना हुआ था. कई स्थानों पर बमबाजी की घटनाएं सामने आईं, जिससे मतदान प्रक्रिया पर खतरा मंडराने लगा. पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाई, फिर भी तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.
सार्वजनिक स्थानों और मतदान केंद्रों के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. भारी पुलिस बल तैनात रहा और हर गतिविधि पर नजर रखी गई. बावजूद इसके कई जगहों पर झड़पें हुईं और बम फेंकने की घटनाओं ने चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की. लेकिन प्रशासन की सतर्कता और पुलिस की तैनाती से मतदान जारी रहा और अंततः शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न हुआ.
संध्या के समय मतगणना पूरी हुई, जिसमें भाजपा के उम्मीदवारों ने सभी सीटों पर बढ़त बनाते हुए शानदार जीत हासिल की. भाजपा समर्थकों ने जीत की खुशी में जगह-जगह गेरुए रंग का अबीर उड़ाया और विजय जुलूस निकाले. खेजुरी से भाजपा विधायक शांतनु प्रमाणिक ने कहा कि यह जीत जनता का भरोसा दर्शाती है और पार्टी को क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा.
चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे क्षेत्र की स्थिरता और विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया. वहीं प्रशासन ने जनता से शांति बनाए रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की. पुलिस ने आश्वासन दिया कि किसी भी प्रकार की हिंसा या अशांति की घटना पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
इस तरह खेजुरी के गढ़ाहार सहकारी समिति के चुनावों में भाजपा ने सभी सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की. भारी सुरक्षा, तनाव और बमबाजी के बावजूद मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई और भाजपा की जीत ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है.
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सोनम वांगचुक (फाइल फोटो)
लद्दाख के लेह में हुई हिंसा के बाद से ही पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक लगातार विवादों में घिरे हुए हैं. पहले सरकार ने उनके संगठन स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया था. अब ताज़ा जानकारी सामने आ रही है लेह लद्दाख पुलिस ने सोनम वांगचुक को शुक्रवार (26 सितंबर) को गिरफ्तार कर लिया है.
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Happy shree krishna janmashtami
Shri Krishna was born to Devaki and Vasudev, however was brought up by Yashoda and Nanda in Vrindavan. The festival generally falls on the Ashtami Tithi of Krishna Paksha or 8th day of the dark fortnight on the month of Bhadrapad . It is said that lord Krishna was born in Mathura Prison. Therein, his life was in danger from his maternal uncle, kansa. The tyrant Kansa, was told by a voice in the sky that one of her children would kill him. Kansa decided to kill Devaki so that she does not give rise to any children, but Vasudeva, her husband begged Kansa to forgive Devki and promised that he will give any of her child to Kansa, so then Kansa on this assurance from Vasudev,
अफगानिस्तान ने तैनात की स्कड मिसाइल
अक्टूबर 2025 में अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा यानी डूरंड लाइन पर तेज झड़पों ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है. पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि अफगान पक्ष और सीमा के पास तालिबान-सुरक्षित जोन से 'आक्रामक गतिविधियां' हुईं. जबकि अफगान तालिबान ने पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक व सीमा पार हमलों का पलटवार किया. दोनों तरफ नागरिक एवं सैन्य हताहतों की रिपोर्टें आईं. बाद में दोनों देशों ने 48-घंटे का अस्थायी सीजफायर लागू करने पर सहमति जताई.
तबाही और मौतें
रिपोर्टों में दोनों तरफ से दर्जनों मौतें और बड़े जन-स्थल विस्थापन की सूचनाएं आईं. क्षेत्रीय मध्यस्थों के दबाव और चर्चा के बाद 48-घंटे का अस्थायी सीजफायर घोषित हुआ.
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान में टीटीपी (पाकिस्तानी तालिबान) और कुछ बागी समूहों का आश्रय स्थल है. जबकि अफगान पक्ष ने पाक के इन आरोपों का खंडन किया है.
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच रिश्ते अब बेहद खतरनाक दौर में पहुंच गए हैं. 9 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तान की वायुसेना ने अफगानिस्तान के काबुल और खोस्त शहरों पर हवाई हमले किए थे, जिसके बाद संघर्ष बढ़ गया है. पाकिस्तानी टैंकों पर अफगानिस्तान के सैनिकों का कब्जा कर लिया. इन हमलों के बाद तालिबान सरकार ने पाकिस्तान सीमा के पास सोवियत काल की स्कड-बी (Scud-B) बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात कर दीं. इस कदम से पहले से तनावपूर्ण माहौल और बिगड़ गया.
स्कड-बी मिसाइल एक सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे सोवियत संघ ने 1950 के दशक में बनाया था. यह मिसाइल आज भी कई देशों की सेनाओं में सक्रिय है, जिनमें उत्तर कोरिया, ईरान, सीरिया और अब अफगानिस्तान शामिल हैं. यह मिसाइल लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तक हमला करने में सक्षम है और एक टन तक विस्फोटक लेकर जा सकती है. इसका ईंधन तरल होता है और इसे मोबाइल लॉन्चर वाहन से दागा जाता है. हालांकि इसकी सटीकता आधुनिक मिसाइलों की तुलना में कम है, लेकिन यह अब भी युद्ध के मैदान में खतरनाक मानी जाती है.
अफगानिस्तान को स्कड मिसाइलें कैसे मिलीं
अफगानिस्तान को स्कड मिसाइलें 1980 के दशक में सोवियत संघ से मिली थीं. सोवियत सेना ने अफगान युद्ध के दौरान देश की तत्कालीन सरकार को सैकड़ों मिसाइलें और लॉन्चर दिए थे. उस समय इन मिसाइलों का इस्तेमाल तालिबान के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया था. 1988 के बाद सोवियत सेना के हटने पर कुछ मिसाइलें अफगान इलाके में रह गईं. इन्हीं मिसाइलों पर बाद में तालिबान ने नियंत्रण हासिल कर लिया.