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Delhi Weather Update: शनिवार को दिल्ली में हुई मध्यम से तेज बारिश ने लोगों को थोड़ी राहत भी दी और परेशानी भी. एक तरफ गर्मी से परेशान लोगों ने मौसम का मज़ा लिया, वहीं दूसरी तरफ कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम से आमजन को दिक्कतों का सामना करना पड़ा. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, रविवार को भी गरज के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना है. विभाग ने राजधानी और आसपास के इलाकों में येलो अलर्ट जारी किया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.
कितनी हुई बारिश?
आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, सफदरजंग वेदर स्टेशन पर शाम 5:30 बजे तक 24.8 मिमी बारिश दर्ज की गई. लोधी रोड पर 27 मिमी पानी बरसा. पालम इलाके में 16.5 मिमी बारिश हुई. बारिश के चलते शनिवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से थोड़ा कम था. वहीं न्यूनतम तापमान 25.7 डिग्री सेल्सियस रहा.
जलभराव और ट्रैफिक जाम से बढ़ी मुश्किलें
बारिश के कारण उत्तर, मध्य, दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कई हिस्सों में पानी भर गया. निचले इलाकों और मुख्य सड़कों पर जलभराव के कारण लोगों को लंबा जाम झेलना पड़ा. लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को उनके कंट्रोल रूम में कम से कम 10 जलभराव की शिकायतें मिलीं. अधिकांश मामलों में एक घंटे के भीतर पानी निकाल दिया गया, लेकिन लोगों को तब तक जाम और परेशानी झेलनी पड़ी.
मौसम विभाग की चेतावनी
आईएमडी ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि भारी बारिश और तेज हवाओं से यातायात जाम और सड़कों पर फिसलन हो सकती है. बागानों और खेतों की फसलें प्रभावित हो सकती हैं. कच्चे मकान, झुग्गी-झोपड़ियां और कमजोर दीवारें आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं. विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि जहां तक संभव हो, घर के अंदर ही रहें. खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें. पेड़ों के नीचे शरण न लें और बिजली के तारों से दूर रहें. जलभराव वाले इलाकों और खुले विद्युत पोल के पास खड़े न हों.
पिथौरागढ़ में लैंडस्लाइड के बाद रेस्क्यू करती NDRF की टीम
Pithoragarh Heavy Rain and Landslide News: उत्तराखंड में एक बार फिर बारिश आफत बनकर बरसी है. पिथौरागढ़ जिले में रविवार (31 अगस्त) को हुई मूसलाधार बारिश ने 280 मेगावाट की धौलीगंगा बिजली परियोजना को संकट में डाल दिया. बारिश से हुए भारी भूस्खलन ने परियोजना की सामान्य और इमरजेंसी दोनों सुरंगों के मुहाने को पत्थरों और मलबे से बंद कर दिया. इस दौरान सुरंगों के अंदर काम कर रहे 19 कर्मचारी फंस गए.
हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक 8 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि 11 को बचाने का अभियान जारी है. जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने जानकारी दी कि रविवार को बारिश के बाद अचानक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में पावर प्रोजेक्ट की सुरंगों के बाहर का हिस्सा आ गया. इसके चलते सामान्य और आपातकालीन दोनों रास्ते बंद हो गए. सुरंग के अंदर मौजूद कर्मचारी बाहर नहीं निकल पाए और वहीं फंस गए.
बिजली उत्पादन पर नहीं पड़ा असर
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन हरकत में आ गए. आनन-फानन में राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया. सीमा सड़क संगठन (BRO) और स्थानीय प्रशासन की जेसीबी मशीनों को मौके पर लगाया गया. अब तक 19 में से 8 कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया गया है. बाकी 11 को सुरक्षित निकालने की कोशिशें जारी हैं. अधिकारियों का कहना है कि सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और उनके पास खाने-पीने का पर्याप्त सामान मौजूद है.
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भूस्खलन से पावर प्रोजेक्ट के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है. विद्युत उत्पादन सामान्य रूप से जारी है. पिथौरागढ़ जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने कहा, "स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है. सभी कर्मचारियों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है. चिंता की कोई बात नहीं है."
पुलिस-SDM ने दी स्थिति की जानकारी
पिथौरागढ़ की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने बताया कि बड़े-बड़े पत्थरों ने सुरंग का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया था, जिसे हटाने के लिए लगातार जेसीबी मशीनें लगी हुई हैं. उन्होंने कहा कि फंसे हुए मजदूर और कर्मचारी लगातार कंपनी और प्रशासन से संपर्क में हैं. वहीं, धारचूला के उप-जिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा ने भी आश्वस्त किया कि बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीम मौके पर लगातार काम कर रही है और जल्द ही सभी को सुरक्षित निकाल लिया जाएगा.
हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि सुरंग के अंदर कर्मचारी सुरक्षित हैं और जल्द ही बाहर आ जाएंगे. जेसीबी मशीनों से लगातार मलबा हटाया जा रहा है. बिजली उत्पादन पूरी तरह से सामान्य है और किसी प्रकार का बड़ा खतरा नहीं है. अधिकारियों ने जल्द से जल्द स्थिति सामान्य होने की आशंका जताई है.
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Mumbai Weather Update: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार को मुंबई और महाराष्ट्र के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है. पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश से मुंबई शहर और उपनगरों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और रोजमर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हुई है. अब मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले घंटों में बारिश और तेज हो सकती है.
मुंबई में मौसम का हाल
मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे. हल्की से मध्यम बारिश दिनभर जारी रही. मौसम विभाग का कहना है कि शहर में अधिकतम तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा. मुंबई और उपनगरों के लिए आज ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि पहले सिर्फ येलो अलर्ट था. लगातार बढ़ती बारिश की तीव्रता को देखते हुए यह चेतावनी बदली गई है. इसका मतलब है कि अगले कुछ घंटों में तेज बारिश की संभावना है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है.
महाराष्ट्र के बाकी जिलों में भी अलर्ट
केवल मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है.
इसका मतलब है कि राज्य के ज़्यादातर हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है.
मौसम विभाग का पूर्वानुमान
IMD की वेबसाइट के मुताबिक, कोकण-गोवा और दक्षिण महाराष्ट्र के ज़िलों में ज्यादातर जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी. वहीं, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र के ज़िलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है. तेज़ हवाएं भी चलेंगी, जिनकी गति 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटा तक जा सकती है और झोंकों में यह 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है.
भारी बारिश की वजह क्या है?
मौसम विभाग के मुताबिक, विदर्भ और आसपास के इलाकों में बने चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के कारण यह बारिश हो रही है. इस सिस्टम के उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने से कोकण और मुंबई क्षेत्र में तेज़ बारिश हो रही है.
बीते 24 घंटे का हाल
शुक्रवार को भी मुंबई में सुबह से हल्की बारिश हो रही थी, लेकिन दोपहर तक यह बारिश तेज़ हो गई. बीएमसी (Brihanmumbai Municipal Corporation) के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 8:30 बजे से शाम 6 बजे तक मुंबई में 61 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई.
बारिश से जनजीवन पर असर
लगातार हो रही बारिश से मुंबई और आसपास के जिलों में जगह-जगह पानी भर गया है. सड़कें डूबने से ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई है और कई ट्रेनों व उड़ानों पर भी असर पड़ा है. राज्य के कई हिस्सों में बारिश से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 1 व्यक्ति लापता है. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और सुरक्षित जगहों पर रहें.
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Delhi Floods News: दिल्ली इन दिनों भीषण बाढ़ की चपेट में है. यमुना का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और इसका असर राजधानी के ज्यादातर इलाकों पर दिखाई दे रहा है. निचले इलाकों में पानी भरने से हजारों लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं. प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं, लेकिन हालात अभी भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं.
यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ा
मौसम विभाग और जल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में हुई लगातार बारिश और पहाड़ी राज्यों से छोड़े गए पानी की वजह से यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ा है. कई जगहों पर यमुना का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है. इसका सीधा असर दिल्ली के निचले इलाकों पर पड़ा है, जहां पानी भरकर लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है.
हजारों लोग बेघर
बाढ़ के कारण दिल्ली के कई इलाकों में पानी भर गया है। खासकर मजनू का टीला, कश्मीरी गेट, वजीराबाद, लोहे का पुल और यमुना किनारे बसी बस्तियों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं. यहां रहने वाले हजारों परिवार बेघर हो गए हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है. लोग अपने घरों का सामान, छोटे बच्चे और बुजुर्गों को लेकर राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं. कई परिवारों को सड़क किनारे या फ्लाईओवर के नीचे रात बितानी पड़ रही है.
यातायात और जनजीवन पर असर
बाढ़ ने दिल्ली की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है. कई प्रमुख सड़कों पर पानी भरने से ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा हो गई है. सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ है. मेट्रो स्टेशन के आसपास पानी भर जाने से यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई स्कूलों और दफ्तरों को बंद करना पड़ा है ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम अलर्ट
हालात को देखते हुए प्रशासन ने एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) और एसडीआरएफ की टीमों को राहत और बचाव कार्य में लगाया है. नावों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. दिल्ली सरकार ने यमुना के किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं और किसी तरह का जोखिम न उठाएं.
स्वास्थ्य और स्वच्छता की चिंता
बाढ़ के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. गंदे पानी और नमी की वजह से डेंगू, मलेरिया, दस्त और स्किन इंफेक्शन जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमें तैनात की हैं और प्रभावित इलाकों में हेल्थ कैंप लगाए जा रहे हैं. वहीं, पीने के पानी और साफ-सफाई को लेकर भी चुनौतियां बढ़ गई हैं.
आम लोगों की परेशानियां
बाढ़ से सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जो रोज कमाने-खाने वाले हैं. उनके घर और सामान पानी में डूब गए हैं, रोजगार बंद हो गया है और खाने-पीने की समस्या खड़ी हो गई है. बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है. लोग राहत सामग्री और सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं.
सरकार ने की मदद की घोषणा
दिल्ली सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया है. प्रभावित इलाकों में अस्थायी कैंप लगाए जा रहे हैं, जहां लोगों को खाना, पीने का पानी और दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं. सरकार ने दावा किया है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.